पूरी दुनिया के साथ ही भारत में भी कोरोना वायरस महामारी अपना विकराल रूप लेती जा रही है। देश में हर दिन बड़ी स्पीड से कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है, साथ ही कोरोना पॉजिटिव लोगों की मौत का ग्राफ भी हर रोज बढ़ रहा है। कोरोना से इस लड़ाई के बीच देश के 548 जिलों में लॉकडाउन लागू कर दिया गया है। लोगों से घरों में रहने की अपील की जा रही है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक ताजा स्टडी में दावा किया गया है कि अगर सख्ती से घरों में रहने का ये फॉर्मूला सफल हो जाए तो कोरोना को बहुत हद तक हराया जा सकता है।

भारत में कोरोना वायरस अभी स्टेज 2 पर है और तीसरे स्टेज की ओर बढ़ रहा है। इस स्टेज में कोरोना कम्यूनिटी स्प्रेड होता है. यानी कोरोना वायरस का सामुदायिक संक्रमण, अगर ये होने लगा तो हालात बेकाबू हो जाएंगे। ऐसी हर मुमकिन खतरे को भांपते हुए केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारें सख्त हो गई हैं। लॉक डाउन और कर्फ्यू का रास्ता अपनाया जा रहा है ताकि लोग एक-दूसरे के टच में न आ सकें। आइसीएमआर की ताजा स्टडी भी इसी ओर इशारा कर रही है कि अगर सख्ती के साथ क्वारंटीन, होम स्टे जैसे फॉर्मूले को अपना लिया जाए तो इस वायरस के अनुमानित संदिग्ध केसों में 62 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। साथ ही पीक केसों की संख्या 89 प्रतिशत तक गिर सकती है।

ऐसे में ये जरूरी है कि सरकार ने लॉकडाउन का जो रास्ता अपनाया है उस पर पूरी तरह अमल किया जाए। दुनिया के दूसरे देशों से अब तक जो खबरें आई हैं उसमें यही सामने आया है कि जिन देशों ने होम क्वारंटीन और लॉक डाउन समय रहते अपनाया वहां कोरोना वायरस अपनी जड़ नहीं जमा पाया।सिंगापुर, हांगकांग और दक्षिण कोरिया इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। डबल्यूएचओ ने भी लॉकडाउन के साथ प्रॉपर टेस्टिंग और संक्रमितों की पहचान को ही बड़ा बचावा माना है। अब भारत भी इसी रास्ते पर है। ऐसे में जनता के सहयोग से कोरोना को हराया जा सकता है।

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