कोरोना वायरस के कारण दिल्ली से पलायन कर रहे दिहाड़ी मजूदरों के लिए खाना और ठहरने के इंतजाम वाली याचिका की सुनवाई के दौरान आज केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सुबह 11 बजे तक एक भी प्रवासी मजूदर सड़क पर नहीं है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को बताया कि केंद्रीय गृह सचिव ने बताया है कि सुबह 11 बजे तक एक भी दिहाड़ी मजदूर सड़क पर नहीं हैं।' चीफ जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस एल नागेश्वर राव सुन रहे हैं याचिका। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि शेल्टर होम आदि के प्रबंधन का काम वालेंटियर को दिया जाए, पुलिस को नहीं। उन्होंने सरकार से कहा कि आप यह सुनिश्चित करें कि वॉलेंटियर लाए जाएं, बल या धमकी का उपयोग नहीं होना चाहिए।

दिल्ली से अपने घरों के लिए दूसरे राज्यों को पलायन कर रहे मजदूरों को भोजन, परिवहन, मेडिकल सहित अन्य पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग वाली याचिका पर केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 5 जनवरी को भारत में कोरोना वायरस के पहले मामले की पहचान हुई थी और सरकार ने 17 जनवरी से इसके खिलाफ तैयारियां शुरू कर दी थी।

विडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए हुई, सुनवाई में जज, याचिकाकर्ता वकील और सॉलिसिटर जनरल ने अपने अपने घर से शामिल हुए। तुषार मेहता कहा कि देशभर के एयरपोर्ट पर 15.5 लाख और सीपोर्ट पर 12 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि कैंप में रखे गए लोगों की चिंता कम करने के लिए सभी धर्म सम्प्रदाय के नेताओं और धर्म गुरुओं की सहायता ली जाय। इससे उनमें पैनिक कम किया जा सकेगा।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम एक आदेश पारित कर रहे हैं कि कोरोना की जानकारी के लिए केंद्र सरकार 24 घंटे में पोर्टल स्थापित करेंगे। सरकार यह भी सुनिश्चित करे कि जिन लोगों का प्रवास आपने बंद किया है उन सभी को भोजन, आश्रय, पोषण और चिकित्सा सहायता के मामले में ध्यान रखा जाए। केंद्र ने कहा अभी पलायन रुक गया है। लेकिन जो गए हैं उनमें 10 में 3 संदिग्ध हो सकते हैं।

शीर्ष अदालत में वकील अलख आलोक श्रीवास्तव द्वारा दाखिल याचिका में दिहाड़ी मजदूर और उनके परिवारवालों को खाना, पानी और ठहरने के इंतजाम करने की मांग की गई थी। श्रीवास्तव ने अपनी याचिका में पैदल अपने घर जा रहे दिहाड़ी मजदूरों और उनके परिजनों के लिए खाना, पानी और रहने की व्यवस्था की मांग की है।