बिहार में कोरोना के संक्रमण दर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। राज्य में एक ओर जहां मरीजों की संख्या में कमी आई है वहीं जांच की संख्या में लगातार वृद्धि की जा रही है। इस बीच रिकवरी रेट में भी वृद्धि दर्ज हुई है। कहा जा रहा है कि राज्य सरकार द्वारा लॉकडाउन लगाने के फैसले का परिणाम है कि कोरोना की रफ्तार में लगाम लगाई जा सकी तथा कोरोना चेन को तोडऩे में काफी हद तक सफलता मिली है।

बिहार राज्य स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य में पांच मई को लॉकडाउन लगाया गया था। इस दिन राज्य में 95,248 नमूनों की जांच की गई थी, जिसमें से 14,836 नए मामले सामने आए थे। इस दिन संक्रमण दर 15.57 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इधर, लॉकडाउन के दौरान बुधवार को यानी 26 मई को संक्रमण की दर 1.97 प्रतिशत दर्ज की गई। इस तरह देखा जाए तो राज्य में लॉकडाउन के बाद बुधवार तक कोरोना संक्रमण दर में 13.60 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों को अगर सच मानें तो राज्य में संक्रमण दर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। 10 मई को राज्यभर में 1,00,112 नमूनों की जांच की गई थी, जिसमें से 10,174 पॉजिटिव पाए गए थे। इस दिन संक्रमण दर 10.16 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

इसके बाद 15 मई को संक्रमण दर में और गिरावट दर्ज की और यह 6.65 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसके बाद 20 मई को राज्य में 1,40,070 नमूनों की जांच की गई, जिसमें 5,871 लोगों को संक्रमित पाया गया। इस दिन संक्रमण दर 4.19 फीसदी दर्ज की गई। इसी तरह 24 मई को संक्रमण दर 2.22 प्रतिशत और इसके एक दिन बाद यानी 25 मई को संक्रमण दर 2.29 प्रतिशत तक पहुंच गई। राज्य में 26 मई को 1,31,916 नमूनों की जांच की गई, जिसमें 2603 नए मरीज मिले। इस दिन संक्रमण की दर गिरकर 1.97 प्रतिशत तक पहुंच गई। राज्य में बुधवार को सक्रिय मरीजों की संख्या 30,992 तक पहुंच गई है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय भी कहते हैं कि कुछ दिन पहले तक जहां प्रतिदिन मरीजों के मिलने का आंकड़ा जहां 15 हजार को पार कर गया था अब वह गिर गया है। उन्होंने कहा कि संक्रमण दर में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। बिहार में पहले पांच से 15 मई तक लॉकडाउन लगाया गया था, लेकिन इसे फिर बढ़ाकर 25 मई और फिर एक जून तक कर दिया गया है।