बिहार में कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए चिन्हित पटना के नालंदा चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (एनएमसीएच) में वैशाली जिले के 60 वर्षीय पॉजिटिव इलाज के बिना बेड पर तड़पते रहे, लेकिन कोई चिकित्सक उनके इलाज के लिए नहीं आया। वैशाली जिले के महनार बाजार निवासी आशोक कुमार (60) को पिछले एक सप्ताह से सर्दी-खांसी और सांस लेने की तकलीफ थी। 

22 जुलाई की शाम उनकी तबीयत अधिक बिगडऩे पर उन्हें हाजीपुर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके अगले दिन गुरुवार को उनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई और उन्हें एनएमसीएच रेफर कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि 23 जुलाई को कुमार को अपराह्न दो बजे एनएमसीएच के कोरोना वार्ड में भर्ती कराया गया। वहां मौजूद एक नर्स ऑक्सीजन लगाकर चली गई, लेकिन एक घंटे तक कोई भी चिकित्सक मरीज को देखने नहीं पहुंचा। इधर इलाज के बिना मरीज की हालत धीरे-धीरे बिगड़ने लगी। हाजीपुर सदर अस्पताल के चिकित्सक ने रेफर के पेपर में उन्हें वेंटिलेटर पर रखने की सलाह दी थी। 

इसकी जानकारी परिजनों ने नर्स को दी, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कुमार के साथ एनएमसीएच गये उनके पुत्र लक्ष्यांशु कुमार अस्पताल के कोरोना वार्ड के स्वाथकर्मियों और कोरोना कंट्रोल रूम से गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने उनकी गुहार पर ध्यान नहीं दिया। इस तरह वे करीब तीन घंटे तक इलाज के लिए तड़पते रहे और अंतत: उनकी मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि मृतक के रिश्तेदार भागलपुर जिले के रहने वाले पुष्पांकर गुप्ता भी फोन के जरिए स्वास्थ्य विभाग, पटना के अधिकारियों से घंटों गुहार लगाते रहे। एक अधिकारी ने आश्वासन दिया कि अस्पताल के अधीक्षक को बता दिया गया है और चिकित्सक जल्द ही वार्ड में पहुंचेंगे, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। 

इसके बाद उन्होंने राज्य सरकार द्वारा एनएमसीएच मे प्रतिनियुक्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी से मोबाइल फोन पर बात कर कोई चिकित्सक के नहीं आने और मरीज का शीघ्र इलाज शुरू करवाने की गुहार लगाई तो उन्होंने कंट्रोल रूम से बात करने की हिदायत दी गई। बाद में कंट्रोल रूम के लैंड लाइन नंबर पर रिंग कर कोरोना वार्ड में अशोक कुमार नाम के मरीज की हालत खराब होने और तुरंत चिकित्सक भेजने का आग्रह किया। वहां उपस्थित कर्मी ने कहा, चिकित्सक जा रहे हैं। यदि जल्दबाजी है तो इमरजेंसी वार्ड के सामने गोलंबर के पास चिकित्सक बैठे हुए हैं, आप स्वयं जाकर चिकित्सक से मरीज को देखने का आग्रह कर सकते हैं। इसके बाद गोलंबर के पास चिकित्सक को ढूंढा गया, लेकिन कोई भी नहीं मिला और अंतत: मरीज की जान चली गई।