कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान देशभर में जारी बंदी की वजह से देश के कोने-कोने से लोग वापस अपने अपने गृह राज्य को लौट रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या में बिहार के दिहाड़ी मजदूर शामिल हैं। एक आकलन के मुताबिक अकेले बिहार के अलग-अलग राज्यों में 20 लाख दिहाड़ी मजदूर और श्रमिक रहते हैं। अब इन लोगों का अपने गृह राज्य को पलायन शुरू हो गया है।

रालोसपा के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव माधव आनंद का मानना है बिहार की आर्थिक स्थिति बंदी की वजह से बदतर हो गई है। बिहार में उद्योग बहुत कम हैं। तकरीबन 80 फीसदी लोग अभी भी खेती बारी पर निर्भर करते हैं। देश की मौजूदा स्थिति को देखकर ऐसा आकलन किया गया है कि कम से कम एक साल तक दिहाड़ी मजदूर वापस काम पर नही लौटेंगे। ऐसी स्थिति में उनके लिए रोजगार का सृजन करना बिहार सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में उनका मानना है कि केंद्र, बिहार सरकार को डेढ़ लाख करोड़ का स्पेशल पैकेज दे।

माधव आनंद के मुताबिक, तकरीबन 3 लाख लोग अब तक बिहार पहुंच चुके हैं और राज्य के तकरीबन 15 से 20 लाख दिहाड़ी मजदूर अभी भी देश के दूसरे राज्यों में फंसे हैं। देर-सवेर ये लोग बिहार वापस लौट सकते हैं। ऐसे में राज्य में रोजी रोटी की इंतजाम करना एक बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्य सरकारों के मुताबिक, पंजाब में एक लाख 20 हजार बिहार के श्रमिक हैं। हरियाणा में एक लाख 40 हजार, गुजरात मे 1 लाख 26 हजार, उत्तर प्रदेश में 64 हजार, महाराष्ट्र में 2 लाख 60 हजार, तमिलनाडु में 98 हजार, केरल में 40 हजार, कर्नाटक में 61 हजार, राजस्थान में 75 हजार और दिल्ली में दो लाख 40 हजार प्रवासी बिहारी रहते हैं। उन्होंने बताया कि ये आंकड़ा सिर्फ रजिस्टर्ड प्रवासी मजदूरी की है, जबकि इन आंकड़ो से कहीं अधिक लोग अलग-अलग राज्य में फंसे हैं, जो वापस आना चाहते हैं।