बिहार में भी नोवेल कोरोना वायरस को राज्य सरकार ने महामारी घोषित कर दिया। बिहार सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने, जांच और इलाज में सहयोग नहीं करने वालों पर सामाजिक हित में कानूनी कार्रवाई करने तथा इसके लिए प्रशासन को व्यापक अधिकार देने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग की अनुशंसा पर राज्य में ‘एपिडेमिक डिजीज, कोविड-19, नियमावली 2020’ को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। 

स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में राजकीय गजट के माध्यम से अधिसूचना जारी कर दी है। इस नियमावली को केंद्रीय कानून ‘द एपिडिमिक डिजीज एक्ट, 1897’ के विभिन्न प्रावधानों के तहत लागू किया गया है। नियमावली के लागू हो जाने से राज्य के सभी सरकारी एवं गैर सरकारी अस्पतालों को संदिग्ध की स्क्रीनिंग के समय यदि उसने कोविड-19 (कोरोना वायरस डिजीज, 2019) के संक्रमण से प्रभावित देशों की यात्रा की है या वे वहां से आए हैं का रिकॉर्ड रखना होगा। यदि उक्त संदिग्ध के पिछले 14 दिनों के रिकॉर्ड से उसके ऐसे देशों में आने या जाने की पुष्टि होती है तो उसे उसके आवास में 14 दिनों तक निगरानी में रखा जाएगा।

यदि पिछले दिनों के रिकॉर्ड से यह पता चले कि संबंधित व्यक्ति ने 29 फरवरी 2020 के बाद कोरोना वायरस से संक्रमित देश की यात्रा की है या वैसे देश से यहां आए हैं और उनमें संक्रमण के लक्षण दिखाई देते हैं तो उन्हें तय मानकों के अनुरूप अस्पताल में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में रखा जाएगा। इससे संबंधित सभी सूचनाएं जिले के सिविल सर्जन को दी जाएगी। संदिग्ध की सूचना मिलते ही नियमावली के उप नियम तीन के तहत अधिकृत अधिकारी प्रधान निदेशक (राज्य स्तर पर संक्रामक रोग), जिलाधिकारी, सिविल सर्जन, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (एसीएमओ), अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल एवं प्रखंड स्तर के चिकित्सा प्रभारी एवं अन्य अधिकारी को अधिकार होगा कि वे संक्रमण के लक्षण वाले व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराएंगे। 

यदि किसी व्यक्ति के संक्रमित होने और वह जहां रह रहा है वहां उसके होने से संक्रमण का प्रसार तेजी से होने की पर्याप्त सूचना हो तो अधिकारी उस परिसर में जाकर जबरन उसकी जांच करवा सकते हैं या उसे निगरानी में रख सकते हैं। कोविड-19 से संक्रमित होने की आशंका वाला व्यक्ति या किसी परिसर का मालिक संक्रमण के प्रसार या बचाव से संबंधित कदम उठाने या निगरानी अधिकारी द्वारा बताए गए नियमों के अनुपालन में लापरवाही बरतता है तो संबंधित जिलाधिकारी उसके खिलाफ अपराध प्रक्रिया संहित की धारा 133 के तहत यथोचित कार्रवाई कर सकते हैं। 

इस नियमावली के तहत जिलाधिकारी को अधिकार दिया गया है कि वे किसी भी गांव, प्रखंड, नगर, वार्ड, कॉलोनी या किसी भी भौगोलिक क्षेत्र में किसी व्यक्ति के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की सूचना मिले तो वह तत्काल कार्रवाई कर सकते है। वे उन क्षेत्रों में स्थित स्कूल, कार्यालय को बंद कर सकते है और भीड़ के एकत्र होने पर रोक लगा सकते हैं। जिलाधिकारी संबंधित क्षेत्र में वाहनों के परिचालन पर भी रोक लगा सकते हैं। सभी संदिग्ध मरीजों को अस्पताल में आइसोलेशन के लिए भर्ती किया जा सकता है। उन इलाकों में किसी भी सरकारी विभाग के कर्मी को ड्यूटी में राहत दी जा सकती है। बिहार में कोरोना वायरस को लेकर गलत नीयत से इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट या सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाह फैलाने वाले किसी भी व्यक्ति, संस्थान या संगठन पर कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए, नियमावली में लोगों को सलाह दी गयी है कि वे ऐसे किसी कार्य में शामिल न हों अन्यथा उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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