नेपाल की दो तिहाई आबादी में कोरोना से लड़ने में मददगार एंटीबाडी पाई गई है जो यह दर्शाती है कि इन लोगों के शरीर में कोरोना संक्रमण के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो चुकी है और अप्रत्यक्ष तौर पर इन्होंने कोरोना संक्रमण का सामना किया है। 

स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्रालय की ओर से कराए एक सीरो सर्वेक्षण में यह बात उभर कर सामने आई है और इससे स्पष्ट है कि कोरोना संक्रमण नेपाली समाज में काफी हद तक था लेकिन लोगों की शरीर प्रतिरोधक क्षमता ने इसका डटकर मुकाबला किया और उन्होंने प्राकृतिक तरीके से कोरोना को मात दे दी। मंत्रालय के मुताबिक सीरो सर्वेक्षण पांच जुलाई से 14 अगस्त के बीच छह वर्ष से अधिक उम्र के 13,161 लोगों पर किया गया था और इन नमूनों को नेपाल की जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला में भेजा गया था। 

मंत्रालय ने बताया कि कुल नमूनों में से 68.6 प्रतिशत में एंटीबाडीज पाई गई और इनमें वे लोग भी थे जिन्हें वैक्सीन लगी थी और अन्य लोग वे थे जिन्होंने कोई वैक्सीन नहीं ली थी। मंत्रालय के संयुक्त प्रवक्ता समीर कुमार अधिकारी ने बताया कि दो तिहाई आबादी में कोरोना एंटीबाडीज का पाया जाना यह दर्शाता है कि इस विषाणु के खिलाफ लोगों के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई है और यह नजरिए से भी अधिक महत्वपूर्ण है कि नेपाल में कोराना टीकाकरण बहुत ही सीमित हुआ है। उन्होंने बताया कि नेपाल में रविवार तक कुल तीन करोड़ आबादी में 56 लाख लोगों को वैक्सीन का पहला डोज दिया जा चुका है और लगभग 40 लाख लोगों को दोनो वैक्सीन लग चुकी हैं। नेपाल में चीनी वेरो सेल वैक्सीन लगाई जा रही है जिसे साइनोफार्म कंपनी ने विकसित किया है।