कोरोना का घातक डेल्टा वैरिएंट 85 देशों में फैल चुका है। तीसरी लहर को लेकर आशंकाओं का दौर जारी है। कुछ देशों में फिर से लॉकडाउन के हालात बन गए हैं। इन सबके बीच ब्रिटेन से राहत भरी खबर आई है। दावा किया जा रहा है कि एक बार पॉजिटिव होने पर फिर से संक्रमित होने का खतरा कम है।

जानकारी के अनुसार पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने कोरोना वायरस के रिइंफेक्शन पर जनसंख्या निगरानी डेटा जारी किया है। कहा गया है कि नए डेटा से पता चला है कि एक बार कोरोना होने पर फिर इस वायरस के चपेट में आने का जोखिम कम है। इस डेटा को पुन: कोरोना की चपेट में आए लोगों की निगरानी करने और बीमारी के व्यवहार को समझने के लिए सार्वजनिक किया गया है।

विशेषज्ञों ने इस रिपोर्ट के हवाले से दावा किया कि दोबारा कोरोना की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। ब्रिटेन में महामारी की शुरुआत से 30 मई तक कोरोना के दोबारा संक्रमण के 15 हजार 893 मामले पाए गए थे। इस दौरान पूरे ब्रिटेन में 40 लाख लोग कोरोना संक्रमित हो चुके थे। फिर से पॉजिटिव हुए लोगों का आंकड़ा कुल संक्रमण का 0.39 फीसदी ही है। दूसरी तरफ पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड में कोविड-19 के स्ट्रैटजिक डायरेक्टर डॉ. सुसान हॉपकिंस का मानना है कि लोग इस बात को लेकर काफी चिंतित हैं कि क्या वे एक से ज्यादा बार महामारी की जद में आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना की मार फिर से पड़ने की आशंका सही है। लेकिन, यह डेटा वर्तमान में हमें बताता है कि दोबारा संक्रमित होने की दर काफी कम है।

उनके मुताबिक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि फिर से संक्रमित होने के अधिकांश मामलों में मरीज में लक्षण दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संक्रमण की आशंका को कम करने के लिए वैक्सीनेशन और हर समय मार्गदर्शन का पालन करना अहम है। यह डेटा पिछले साल जून से इस बार मई के अंत तक रिइंफेक्सन की आशंका को दिखाता है। इसके बावजूद हम दोबारा कोरोना संक्रमित हुए लोगों पर वैक्सीन का प्रभाव और महामारी की गंभीरता को देखना जारी रखेंगे।