कोरोना महामारी के बचाव का कवच वैक्सीन है, लेकिन वायरस के स्वरूप बदलने के कारण यह सुरक्षा कवच भी अब कमजोर होता दिख रहा है। हालांकि वैक्सीन ने वायरस के प्रभाव को कमजोर जरूर किया है। कोरोना टीकाकरण और संक्रमण को लेकर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने देश का पहला अध्ययन जारी किया है, जिसके अनुसार वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के बाद 76 फीसदी लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। इनमें से 16 फीसदी लोग ही बिना लक्षण वाले मिले, जबकि करीब 10 फीसदी को अस्पतालों में भर्ती करना पड़ा।

अध्ययन के दौरान 361 लोगों की जांच में 274 की आरटीपीसीआर जांच पॉजीटिव मिली। वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के 14 दिन बाद यह लोग कोरोना वायरस की चपेट में आए। आईसीएमआर के अध्ययन के अनुसार कोविशील्ड लेने वालों में अधिक एंटीबॉडी बन रही हैं जबकि कोवाक्सिन लेने वालों में एंटीबॉडी 77 फीसदी ही मिली हैं। मेडिकल जर्नल रिसर्च स्कवायर में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार भुवनेश्वर स्थित आईसीएमआर की क्षेत्रीय लैब में देशभर से वैक्सीन ले चुके 361 लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। जांच में सभी सैंपल कोरोना संक्रमित मिले लेकिन 87 सैंपल को अध्ययन से बाहर करना पड़ा क्योंकि इन लोगों ने वैक्सीन की दोनों खुराक नहीं ली थीं। जांच में 274 लोगों में वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के बाद संक्रमण का पता चला। इनमें से 35 लोगों ने कोवाक्सिन की दोनों खुराक लीं। जबकि 239 ने कोविशील्ड की दोनों खुराक ली थीं।

इसी साल एक मार्च से 10 जून तक चले अध्ययन में पता चला कि कोवाक्सिन की दोनों खुराक लेने के बाद संक्रमित हुए 43 फीसदी स्वास्थ्य कर्मचारी थे। दो खुराक लेने के बाद संक्रमण की चपेट में आने के बीच औसतन अवधि 45 दिन देखी गई है। राहत की बात यह है कि अध्ययन के दौरान कोविशील्ड लेने वाले एक व्यक्ति की पोस्ट संक्रमण होने से मौत होने की पुष्टि की है।