दुनियाभर के देश कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ कारगार टीका बनाने में जुटे हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, चीन और रूस ने इसमें सफलता भी हासिल की है और मानव परीक्षण अंतिम चरण में हैं। बता दें कि ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका कंपनी ने कोरोना वैक्सीन को लगभग तैयार किया है, जिसे 'एस्ट्राजेनेका वैक्सीन' के नाम से जाना जा रहा है। इस वैक्सीन का पहले और दूसरे चरण में इंसानों पर सफल परीक्षण हो चुका है। अब सिर्फ तीसरे यानी अंतिम चरण का ट्रायल बचा है। माना जा रहा है कि यह भी जल्द ही पूरा हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने अंतिम चरण का ट्रायल दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में करने का फैसला किया है, क्योंकि यहां संक्रमितों की संख्या ज्यादा है और लगातार बढ़ती जा रही है।    

चीन की दवा कंपनी सिनोवैक बायोटेक भी कोरोना की वैक्सीन तैयार करने के बेहद करीब है। उसने दुनिया के कई देशों में अपने वैक्सीन का सफल परीक्षण कर लिया है। कंपनी ने तो अब अपने तीसरे यानी अंतिम चरण का ट्रायल भी ब्राजील और बांग्लादेश में शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि बहुत जल्द यह वैक्सीन बाजार में उपलब्ध हो जाएगी।   

ऑस्ट्रेलिया की मेलबर्न युनिवर्सिटी भी कोरोना की वैक्सीन तैयार करने में जुटी हुई है। दावा किया जा रहा है कि यहां के वैज्ञानिकों ने लगभग 100 साल पुरानी टीबी की एक दवा से कोरोना की वैक्सीन तैयार कर ली है। हालांकि यह वैक्सीन कोरोना वायरस से सीधे लड़ने में सक्षम नहीं है, लेकिन इसकी मदद से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाने में मदद मिली है, जिससे कोरोना वायरस को खत्म करना आसान हो गया है। इस वैक्सीन के दो चरणों के ट्रायल पूरे हो चुके हैं और अब तीसरे यानी अंतिम चरण का ट्रायल चल रहा है। वैसे तो वैक्सीन के तीसरे यानी अंतिम चरण के ट्रायल में 1-4 साल तक का समय लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों की मानें तो सभी वैक्सीन के ट्रायल फास्ट ट्रैक मोड में हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि सितंबर-अक्तूबर या फिर इस साल के अंत तक वैक्सीन बाजारों में उपलब्ध हो सकती है।