Rape Case के आरोप में जोधपुर सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कोरोना वायरस समेत अन्य बीमारियों के इलाज के लिए जमानत की मांग की है। न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति देवेंद्र कच्छवाहा की खंडपीठ ने लोक अभियोजक अनिल जोशी को याचिका पर सुनवाई के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS)-जोधपुर से याचिकाकर्ता की मेडिकल रिपोर्ट लेने का निर्देश दिया है।

आसाराम को बुधवार देर रात जोधपुर सेंट्रल जेल से महात्मा गांधी अस्पताल लाया गया था, जहां वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। बाद में फेफड़ों में संक्रमण की वजह से आसाराम को एम्स में रेफर कर दिया गया, जहां अभी उनका इलाज चल रहा है। सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से पेश हुए वकील जेएस चौधरी ने कहा कि याचिकाकर्ता को हृदय सहित कई बीमारियां हैं। कोरोना वायरस संक्रमण के बाद याचिकाकर्ता का स्वास्थ्य खराब है और जोधपुर के बाहर उच्च केंद्र में उन्हें इलाज की जरूरत है। उन्होंने आसाराम को अंतरिम जमानत देने का अनुरोध किया, जिस पर डिवीजन बेंच ने मेडिकल रिपोर्ट तलब की और अगली सुनवाई 13 मई को निर्धारित की।

अगस्त 2013 में एक नाबालिग लड़की ने आसाराम पर जोधपुर के करीब मणई गांव में आश्रम में बलात्कार किए जाने का आरोप लगाया था। इसके बाद एक सितंबर को आसाराम को गिरफ्तार कर लिया गया और जोधपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। नवंबर 2013 में, जोधपुर पुलिस ने आसाराम और चार अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर की। चार्जशीट में आसाराम पर पॉक्सो एक्ट के तहत बलात्कार, यौन शोषण और मानव तस्करी के अलावा अन्य अपराधों के तहत भी आरोप लगाए गए थे। 25 अप्रैल, 2018 को, विशेष अदालत ने मामले में आसाराम को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दो अन्य आरोपियों, शिल्पी और शरद को भी दोषी ठहराया और उन्हें 20 साल की जेल और प्रत्येक को 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।