कोरोना महामारी के दौर में पूरी दुनिया भारत को संकट से उबारने में जुट गई है। दुनिया के कई देश मेडिकल उपकरणों से भरी सप्लाई भारत भेज रहे हैं। जानकारी के मुताबिक रूस मेडिकल सप्लाई से भरे हुए 2 ट्रांसपोर्ट प्लेन भारत भेज रहा है। इनमें ऑक्सीजन को स्टोर करने वाले कंसेट्रेटर, वेंटिलेटर और 22 टन मेडिकल सप्लाई शामिल है। ये प्लेन रूस से उड़ चुके हैं और आज रात तक भारत पहुंचने वाले हैं। 

बताते चलें कि बड़ी संख्या में देश भारत को मेडिकल सहायता भेजने के लिए कदम उठा रहे हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि भारत ने मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय अपील नहीं की है और यह सप्लाई मुख्यत: इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के जरिए हो रही है। भारत इन देशों से ऑक्सीजन संबंधी चीजों और अहम दवाइयों को लेकर दूसरों देशों से उम्मीद लगाये हुए है। वह दूसरे देशों में अपने मिशन प्रमुखों को उनकी खरीद पर अपना प्रयास केंद्रित करने को कह चुका है।

सूत्रों के मुताबिक भारत की कोशिश ऑक्सीजन उत्पादक संयंत्र, ऑक्सीजन कंसेट्रेटर और छोटे- बड़े ऑक्सीजन सिलेंडरों की खरीद पर है। इसकी वजह ये है कि क्योंकि विभिन्न संयंत्रों से ऑक्सीजन को अस्पतालों तक पहुंचाने में भारत पहुंचाने में परेशानी का सामना कर रहा है। भारत अमेरिका और दूसरे देशों से रेमडेसिविर, टोसिलिज़ुमैब और फेवीपिरवीर जैसी अहम दवाओं की खरीद की भी कोशिश कर रहा है। 

सूत्रों का कहना है कि भारत ने अमेरिका से बनी हुई कोरोना वैक्सीन और उसके लिए कच्चे माल की आपूर्ति मांगी है। अमेरिका ने कुछ हद तक भारत की यह अपील मान ली है और मेडिकल सप्लाई लेकर अमेरिकी विमान के शुक्रवार को यहां पहुंचने की संभावना है। वहीं मेडिकल उपकरणों से भरा हुआ रूसी विमान आज रात तक भारत पहुंच जाएगा। 

अमेरिका, रूस, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, बेल्जियम, रोमानिया, लक्समबर्ग, सिंगापुर, पुर्तगाल, स्वीडन, न्यूजीलैंड, कुवैत और मॉरीशस सहित कई प्रमुख देशों ने भारत को महामारी से लड़ने में मदद करने के लिए मेडिकल सहायता की घोषणा की है।

सिंगापुर ने मंगलवार को भारत को 256 ऑक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति की। नॉर्वे सरकार ने भारत में कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों की मेडिकल सेवा के लिए 24 लाख अमेरिकी डॉलर के योगदान का ऐलान किया।