दुनियाभर में कोहराम मचाने वाले कोरोना वायरस ने न्यूजीलैंड के आगे घुटने टेक दिए हैं। दरअसल राज्य में अब कोरोना संक्रमण का एक भी मामला नहीं है। बीते 17 दिनों से यहां कोरोना का कोई नया मामला सामने नहीं आया। न्यूजीलैंड में कोरोना की आखिरी संक्रमित एक महिला थी जो कि बीते 48 घंटों से स्वस्थ है और उसमें अब कोई लक्षण नजर नहीं आ रहा है। इसके साथ ही सोमवार आधी रात से देश में लागू प्रतिबंध खत्म कर देना का ऐलान कर दिया गया है। 

प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डेन ने ऐलान किया है कि उनका देश लेवन-1 अलर्ट से आगे बढ़ेगा, जिसके तहत सोशल डिस्टेंसिंग के नियम लागू रहेंगे। सोमवार आधी रात से शादियों, अंतिम संस्‍कार और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बिना किसी पाबंदी के शुरू किया जाएगा। न्यूजीलैंड की आखिरी मरीज आकलैंड के एक अस्पताल में एडमिट थी, जिन्हें अब डिस्चार्ज किये हुए भी 48 घंटे हो चुके हैं। पीएम ने कहा कि हम एक हफ्ता और इंतजार करेंगे, अगर कोई नया केस सामने नहीं आता है तो न्यूजीलैंड को दुनिया का पहला कोरोना मुक्त देश घोषित कर दिया जाएगा। बता दें कि 50 लाख की आबादी वाले इस देश में कुल 1504 लोग कोरोना की चपेट में आए थे और 22 लोगों की संक्रमण से मौत हुई थी। सभी केस खत्म होने के साथ ही न्यूजीलैंड ने एक ऐप लॉन्च किया है जिसकी मदद से हेल्थ केयर प्रफेशनल्स को केस के अपडेट्स मिलेंगे। न्यूजीलैंड को ये जीत सख्ती से कोरोना के लोकल ट्रांसमिशन को रोकने और ज्यादा से ज्यादा टेस्ट कर संक्रमण का क्लस्टर नहीं बनने दिया।

माइक्रोबायॉलजी प्रफेसर साउक्सी वाइल्स के मुताबिक इससे यह सीखने की जरूरत है कि ऐसा किया जा सकता है। वाइल्स ऑकलैंड यूनिवर्सिटी के बायोलूमिनिसेंट सुपरबग्स लैब की हेड हैं और उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डेन का काम काबिले तारीफ रहा है। वाइल्स का कहना है, हमारी प्रधानमंत्री ने फैसला किया कि जैसा इटली में हुआ है, वह न्यूजीलैंड में नहीं होने देंगी। देश में पहला केस 26 फरवरी को पाया गया था। उधर, मार्च के बीच में इटली और स्पेन में केस तेजी से बढ़ रहे थे तब PM ने न्यूजीलैंड आने वाले लोगों को क्वारंटीन करने का आदेश दे दिया। उस वक्त देश में 6 केस थे। 19 मार्च को उन्होंने बाहर से देश में आने पर पाबंदी लगा दी।