कोरोना न सिर्फ लोगों को शारीरिक रूप से कमजोर कर रहा है, बल्कि मानसिक रूप से भी लोगों को प्रभावित कर रहा है। कोविड संक्रमण, स्थानीय लॉकडाउन और वित्तीय कठिनाइयों के कारण अधिकांश लोगों के मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट आई है। 

कोविड पर एक नए शोध के मुताबिक महामारी के पहले 6 महीनों के दौरान लगातार हर 9 वयस्कों में से 1 वयस्क बहुत खराब या खराब मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहा है। शोध करने वाले मैनचेस्टर विश्वविद्यालय, किंग्स कॉलेज लंदन, कैम्ब्रिज, स्वानसी और सिटी विश्वविद्यालय से जुड़ी टीम के अनुसार कोविड के दौरान जातीय अल्पसंख्यक समूहों के साथ सबसे अभाव से जूझ रहे लोग मानसिक स्वास्थ्य से बुरी तरह से प्रभावित हैं। 

टीम ने 19,763 वयस्कों पर अप्रैल और अक्टूबर 2020 के बीच मासिक सर्वेक्षणों का विश्लेषण किया था, ताकि विभिन्न विशिष्ट समूहों का खुलासा करते हुए मानसिक स्वास्थ्य में परिवर्तन के विशिष्ट पैटर्न की पहचान की जा सके।द लैंसेट साइकेट्री में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार दो तिहाई वयस्कों का एक ऐसा समूह भी था, जिनका मानसिक स्वास्थ्य महामारी से काफी हद तक अप्रभावित था। मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कैथरीन एनेल ने कहा, समाज में कई लोग ऐसे भी हैं जो आर्थिक रूप से समक्ष हैं, उनपर यह असर नजर नहीं आया।