हरियाणा के भिवानी में एक अलग तरह का मामला सामने आया है। वायरस के कारण पहले चिकन के दाम गिरे तो फिर 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद व्‍यापार पूरी तरह से बंद हो गया। ऐसे में अब मुर्गी फार्म संचालकों ने हाथ खड़े कर दिए हैं और वे खुद को फार्म में पल रहे मुर्गों को दाना खिलाने के लिए सक्षम नहीं बता रहे हैं। आलम ये है कि भिवानी के ढिगावा में मुर्गी फार्म संचालक ने 30000 मुर्गियों को जिंदा दफना दिया। मुर्गी फार्म ने बताया कि इससे उन्‍हें लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।

जानकारी के अनुसार, व्‍यापार ठप होने के कारण मुर्गियों को डालने के लिए फीड नहीं मिल रहा है। मुर्गियां 25 से 30 दिन की हो चुकी थी जिनका वजन 1000 से 1500 ग्राम हो गया था। कोई खरीदार नहीं था तो इनकी सप्‍लाई भी अब कहीं नहीं हो सकती थी। क्‍योंकि होटल समेत सब कुछ बंद है। ऐसे में ऐसा करना पड़ा है। इस मंजर को जिसने भी देखा वो चर्चा करने में जुटा है।

गौरतलब है कि चिकन खाने से कोरोना फैलने की अफवाहें सोशल मीडिया पर पिछले काफी समय से चल रही हैं। इसी का नतीजा है कि लोगों ने चिकन खाना बंद कर दिया, जिसके कारण चिकन के भाव कम होते चले गए। कई जगह तो स्थिति यह हो गई कि 120 रुपए प्रति किलो मिलने वाला मुर्गे की कीमत कम होकर 30 रुपए प्रति किलो तक हो पहुंच गई। फार्म संचालक इस हालत को लेकर पहले से ही बेहद चिंतित थे। इसके बाद 25 मार्च को पीएम मोदी ने देशभर में लॉकडाउन की घोषणा कर दी। ऐसे में मुर्गे फार्मों में ही कैद होकर रह गए।

इन फार्म संचालकों ने कहा अगर मुर्गों को नहीं दफनाते तो ये भूख से ही मर जाते। इसके कारण दुर्गंध भी फैलती और इसके कारण बीमारी भी फैलने का भय बना रहता। इसलिए मुर्गों को जमीन में दफनाने का फैसला लिया गया है। दरअसल ये मामला केवल अब भिवानी तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में अब यही स्थिति बनती जा रही है। वहीं मुर्गों के दाम गिरने से मछली और बकरे के मांस की डिमांड बढ़ गई थी। अंडों के दाम भी गिरने लगे थे। लॉकडाउन के बाद कहीं भी अब मांस की बिक्री नहीं हो रही है। ऐसे में मांस से जुड़ा कारोबार करने वाले लोग बुरी तरह से प्रभावित हैं।

आपको बता दें कि मुर्गियों को जिंदा दफनाए जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी इस प्रकार के कई मामले सामने आ चुके हैं। कर्नाटक के कोलार में एक पोल्ट्री फार्म चलाने वाले व्यक्ति ने करीब 6 हजार मुर्गों को जिंदा जमीन में गाड़ दिया था। उसने जमीन में एक बड़ा गड्डा खोदा और 6 हजार मुर्गे ट्रक में भरकर उसमें गाड़ दिए। उसका कहना था कि मेरे पास इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा था। इस व्यक्ति ने तो इन्हें जिंदा दफनाने का वीडियो भी बनाया था जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। नॉनवेज खाने से कोरोना वायरस फैलने की अफवाहों ने इस कदर जोड़ पकड़ा कि इसका खंडन करने के लिए कर्नाटक में तो मंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से मंच पर चिकन खाया। इतना ही नहीं देश में जगह जगह चिकन मेलों का भी आयोजन किया गया, लेकिन इसके बाद भी पोल्ट्री इंडस्ट्री को खासा नुकसान हुआ है।