दुनिया भर में महारामारी कोरोनावायरस ने तबाही मचा रखी थी लेकिन अब इसका कोहराम थमता हुआ नजर आ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, पिछले दो महीनों में कोरोना के मामलों में लगातार बढ़ोतरी होने के बाद अब इसमें कमी देखी जा रही है। विश्व स्तर पर पर जारी किए गए रिपोर्ट के मुताबिक, नए कोरोनावायरस मामलों की संख्या लगभग 4.5 मिलियन संक्रमितों की संख्या पर स्थिर होती दिख रही है।  यूएएन हेल्थ एजेंसी के साप्ताहिक आंकलन के अनुसार,, पश्चिमी प्रशांत और अमेरिका में COVID-19 की दर करीब 20% और 8% बढ़ी, जबकि अन्य क्षेत्रों में बीमारी की दर समान रही या कमी देखी गई।

कोरोना के नए मामले वाले देशों में अमेरिका, ईरान, भारत, यूनाइटेड किंगडम और ब्राजील का नाम शामिल हैं। मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, यूरोप और अमेरिका में लगभग 10% की वृद्धि के साथ, दुनिया भर में लगभग 68,000 अधिक मौतें दर्ज की गईं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मुख्य वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामीनाथन का कहना है कि भारत में कोविड-19 एक तरह से महामारी के स्थानिकता के चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां निम्न या मध्यम स्तर का संक्रमण जारी है। स्थानिक अवस्था तब होती है जब कोई आबादी वायरस के साथ रहना सीखती है। यह महामारी के चरण से बहुत अलग है, जब वायरस आबादी पर हावी हो जाता है।

कोवैक्सीन को मंजूरी दिए जाने के संबंध में स्वामीनाथन ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि डब्ल्यूएचओ का तकनीकी समूह कोवैक्सीन को उसके अधिकृत टीकों में शामिल करने की मंजूरी देने के लिए संतुष्ट होगा और सितंबर के मध्य तक ऐसा हो सकता है। वैज्ञानिक ने कहा, '' जहां तक भारत का सवाल है, ऐसा जान पड़ता है कि जो हो रहा है, वो भारत के आकार और देश के विभिन्न हिस्सों में जनसंख्या की विविधता और प्रतिरक्षा की स्थिति के कारण है। यह बहुत संभव है कि यह उतार-चढ़ाव की स्थिति इसी तरह जारी रह सकती है।''

उन्होंने उम्मीद जतायी कि वर्ष 2022 के अंत तक ''हम उस स्थिति में होंगे कि हम 70 प्रतिशत तक टीकाकरण के लक्ष्य को हासिल कर लेंगे और फिर देशों में हालात वापस सामान्य हो सकते हैं।'' बच्चों में कोविड के प्रसार पर स्वामीनाथन ने कहा कि माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ''हम सीरो सर्वेक्षण को देखें और हमने अन्य देशों से जो सीखा है, उससे पता चलता है कि यह संभव है कि बच्चे संक्रमित हो सकते हैं। हालांकि, अधिकतर बच्चों को सौभाग्य से बहुत हल्की बीमारी होती है।''