गोवा में मुंबई हाईकोर्ट की पीठ को गोवा के शीर्ष अस्पताल, गोवा मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में ऑक्सीजन की उपलब्धता की कथित कमी की जांच करनी चाहिए और न्यायालय को स्वास्थ्य मुद्दों पर कोविड का प्रबंधन अपने हाथ में ले लेना चाहिए। यह बात प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने मंगलवार को कही। पिछले कुछ महीनों के दौरान राणे की कोविड प्रबंधन के मुद्दों पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के साथ खींचतान देखने को मिली है। राणे ने यह भी कहा कि ऑक्सीजन को लेकर किसी भी प्रकार की कोई अव्यवस्था नहीं है और सावंत को ऑक्सीजन की उपलब्धता के मुद्दे के बारे में गुमराह किया गया है।

राणे ने कहा, मैं हाईकोर्ट से अनुरोध करता हूं कि अगर कुप्रबंधन या कहीं कोई कमी है और विशेषज्ञों का उपयोग करके एक श्वेत पत्र लाया जाए। हाईकोर्ट को जीएमसी के कोविड प्रबंधन को संभालना चाहिए।पिछले कुछ हफ्तों से राणे और सावंत के बीच टकराव चल रहा है । विपक्ष ने आरोप लगाया है कि उनके बीच चल रहे मतभेद राज्य के बढ़ते कोविड मामलों और खूंखार वायरस के कारण मौत के खिलाफ लड़ाई में बाधा डाल रहे हैं। राणे की टिप्पणी सावंत द्वारा व्यक्तिगत रूप से शीर्ष स्वास्थ्य सुविधा का दौरा करने और रोगियों से मिलने के कुछ घंटों बाद सामने आई है, जिन्होंने लगातार ऑक्सीजन की आपूर्ति की शिकायत की, विशेष रूप से रात 2 बजे से सुबह 6 बजे के बीच ऑक्सीजन आपूर्ति की शिकायत मिली है।

राज्य की स्वास्थ्य स्थिति पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि किसी ने सावंत को गुमराह किया है और ऑक्सीजन को लेकर कोई कुप्रबंधन नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी माना कि जीवन रक्षक गैस की कमी जरूर है। राणे ने कहा, हमें 1,200 (जंबो) सिलेंडर की जरूरत है, लेकिन कल हमें केवल 400 मिले।राणे ने हालांकि स्पष्ट किया कि जो मौतें नियमित रूप से रात 2 से 6 बजे के बीच गोवा के शीर्ष अस्पताल में होती हैं, उनमें ऑक्सीजन की कमी के कारणों को लेकर जांच किए जाने की जरूरत होती है।स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, हम कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन मुझे नहीं पता कि कुप्रबंधन कहां है।