कोरोना ने पहले बुजुर्गों को अपना निशाना बनाया और अब दूसरी लहर में कोरोना ने वयस्कों को अपना शिकार बना रहा है। कोरोना से इस बार युवा लोगों की ज्यादा मौतें हो रही है। कोरोना के कहर में युवा सावधानी तो बरत रहे हैं लेकिन कोरोना से नहीं बच पा रहे हैं। वयस्क और बुजुर्ग कोविड वैक्सीन लगवा रहे हैं। लोग वैक्सीन को लेकर जागरूक हो रहे हैं। कई तरह की अफवाहों के बीच में भी कोरोना वैक्सीन ले रहे हैं। कोरोना बच्चों पर बहुत ही जल्दी असर करता है।


वैक्सीन किशोरों, वस्यक और बुजुर्गों को लगाई जा रही है। बच्चों को वैक्सीन नहीं लगाई गई है। दूसरी लहर के कहर के बीच बताया जा रहा है कि अगर तीसरी लहर आती है तो बच्चों पर इसका सबसे ज्यादा खतरा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कई तरीके और दिशा-निर्देश जारी करते हुए बताया है कि किस तरह समझा जाए कि बच्चे में कोविड के लक्षण हैं या नहीं और उनके हालात को काबू में कैसे किया जाए।


स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने ट्वीट में कहा कि  कोविड से संक्रमित ज्यादातर बच्चे या तो लक्षणहीन होंगे या उनमें हल्के लक्षण होंगे। लक्षणहीन मतलब है जब व्यक्ति को कोविड है लेकिन उसमें बीमारी के लक्षण नहीं हैं। इसको कोरोना डबल म्यूटेंट कहते हैं। यह हालत 14 दिन तक बनी रह सकती है जिसकी वजह से मामला ज्यादा बिगड़ सकता है क्योंकि लक्षणहीन व्यक्ति से संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा रहता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी है कि बुखार, कफ, सांस में कमी, थकावट, जोड़ों में दर्द, गले में दर्द, नाक से ज्यादा बलग़म निकलना, स्वाद और गंध का जाना जैसे  कुछ लक्षण हैं जो बच्चों में पाए जाते हैं। बच्चों में पाचनतंत्र की समस्या भी पाई जाती है। वहीं शरीर के अलग-अलग अंगों में जलन की शिकायत पाई जाती है। ऐसे में लगातार बुखार बना रहता है। बच्चे कोविड पॉज़िटिव हैं तो स्क्रीनिंग के जरिए इन बच्चों की पहचान की जा सकती है।