चीन के बाद इटली में कहर बरपा रहे कोरोना वायरस महामारी, कोविड19 ने भारत में दस्‍तक देने के साथ ही अपनी भयावहता दिखानी शुरू कर दी है। अब तक 5 लोगों की मौत जे शेप में फैल रहे खतरनाक कोरोना वायरस से हो चुकी है। जबकि 177 लोग देशभर में अभी इससे संक्रिमत बताए गए हैं। ऐसे में पहला चरण पूरा करने के बाद अब कोरोना वायरस अपना मिजाज बदल रहा है।

अब कोरोना वायरस दूसरे चरण में प्रवेश कर गया है। जहां स्‍थानीय स्‍तर पर इसके फैलाव की संभावना बेहद बढ़ गई है। ऐसे में जाने-अनजाने संदिग्‍धों के संपर्क में आने से यह बीमारी और भी भयावह रूप ले सकती है। ऐसे में जितना हो सके एक-दूसरे से दूर रहें। एहतियात के तौर पर जितना कम हो सके, उतना कम बाहरी संपर्क में रहें, भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
पहले चरण में कोरोना वायरस से प्रभावित देशों से आने वाले आगंतुकों और उनके संपर्क में आने वाले लोगों के जरिये फैला यह वायरस दूसरे चरण में अब धीरे-धीरे स्‍थानीय प्रसार के रास्‍ते ढूंढ रहा है। ऐसे में पब्लिक प्‍लेस में इसके फैलने के खतरे सबसे ज्‍यादा हैं। हालांकि अब तक सीमित दायरे में रहा कोरोना वायरस दूसरे चरण के बाद भयावह रूप अख्तियार कर सकता है। इस फेज में जाने-अनजाने लगातार लोगों का संपर्क बना रहता है, ऐसे में एक भी संक्रमित हजारों लोगों को यह बीमारी ट्रांसमिट कर सकता है।
डॉक्‍टरों के मुताबिक तीसरा चरण और भी खतरनाक हो सकता है। क्‍योंकि इस फेज में कई ऐसे मरीज सामने आ सकते हैं, जिनके बारे में पूरी जानकारी जुटाना खासा मुश्किल है। ऐसे में आइसोलेशन से लेकर क्‍वारंटाइन तक भी मुश्किलें आएंगी। कोरोना वायरस के समाज के निचले स्‍तर तक फैलाव की आशंका बढ़ जाएगी। चौथे चरण में सामुदायिक स्‍तर पर बीमारी का फैलाव होने से कोरोना वायरस बड़ी आबादी को अपनी चपेट में ले लेगा। तब यह सही मायने में महामारी विभीषिका बन जाएगी। इस लिहाज से कोरोना पर दूसरे चरण में ही नियंत्रण पाना बेहद जरूरी और अहम है।
डॉक्‍टर का कहना है कि आइसोलेनशन और क्‍वारंटाइन शब्‍द अधिकतर लोगाें के लिए नया है। ऐसे में लोग कोरोना वायरस के नाम से ही घबरा रहे हैं। यहां जानने की जरूरत है कि आइसोलेशन में उन संदिग्‍ध और संक्रमित मरीजों को रखा जाता है, जो इस खतरनाक वायरस की चपेट में आ जाते हैं। तब उन्‍हें अकेले रखकर उनका इलाज प्रक्रियाबद्ध तरीके से किया जाता है।
क्‍वारंटाइन के बारे में बताएं तो इससे कई लोगों को परेशानी होने की बात कही जाती है। हालांकि सच्‍चाई ऐसा बिल्‍कुल नहीं है। क्‍वारंटाइन में निश्चित समय के लिए संक्रमित मरीज को अलग वार्ड या कमरे में रखा जाता है। ताकि यह बीमारी दूसरे लोगों तक न फैले। इस प्रक्रिया में परिवार वालों को भी संक्रमित मरीज से दूर रखा जाता है।



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