हमारी पृथ्वी का निर्माण 4.5 अरब साल या उससे भी पहले हुआ था। तब से यह अंदर से धीरे-धीरे ठंडी हो रही (core of earth is cooling much faster) है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारी धरती का केंद्र (core of earth) यानी गर्म मैग्मा वाला इलाका अब तेजी से ठंडा होता जा रहा है, ऐसे डर है कि कही पृथ्वी बुध या मंगल ग्रह की तरह ना बन जाए। डर की बात तो यह है कि अगर पृथ्वी का केंद्र ठंडा हो जाता है तो धरती का चुंबकीय क्षेत्र, गुरुत्वाकर्षण (Earth gravity) जैसी ताकतें खत्म हो जाएंगी।

वैज्ञानिकों का कहना है कि जितनी ज्यादा तेजी से कोर की गर्मी (core of earth) बाहरी परतों पर आएगी, धरती उतनी तेजी से केंद्र की गर्मी खोती चली जाएगी। इसके लिए वैज्ञानिक ग्रह के कोर और मैटल की लगातार जांच कर रहे हैं। वैज्ञानिक ब्रिजमैनाइट नाम के खनिज (bridgmanite mineral) पर प्रयोग कर रहे हैं। ये खनिज पृथ्वी के केंद्र में पाया जाता है। वैज्ञानिकों ने ब्रिजमैनाइट नाम के खनिज पर अत्यधिक दबाव और गर्मी डाली, ताकि ऊष्मीय चालकता का अध्ययन किया जा सके हैं। बता दें कि ये प्रयोग स्विट्जरलैंड की राजधानी ज्यूरिख स्थित ईटीएच और कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंस (Carnegie Institution for Science) के वैज्ञानिक कर रहे हैं। 

ऐसे में वैज्ञानिकों का मानना है कि हमें धरती की उत्पत्ति को लेकर फिर से अध्ययन करना पड़ेगा, क्योंकि धरती लगातार ठंडी होती जा रही है, ऐसे में उसकी परतों को खंगालना बहुत जरूर हो गया है। वैज्ञानिक मोतोहिको मुराकामी (Scientist Motohiko Murakami) ने अपनी रिसर्च के बाद जो कहा उसे सुनकर सभी के होश उडऩा लाजमी हैं। दरअसल इनका मानना है कि अगर धरती के ठंडा (core of earth) होने की यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले समय पर पृथ्वी बुध और मंगल की तरह पथरीला ग्रह बन जाएगी।  अगर ऐसा हुआ तो यह अलग तरह की तबाही होगी। चुंबकीय शक्ति खत्म होगी. गुरुत्वाकर्षण खत्म हो जाएगा। वायुमंडल खत्म हो जाएगा। इंसानों के शव अंतरिक्ष में बहने लगेंगे।