मध्यप्रदेश में उपभोक्ताओं को एक बार फिर बिजली बिलों में बढ़ोत्तरी (Increase in electricity bills) का करंट लगने वाला है, बिजली कंपनियों द्वारा वित्तीय वर्ष 202222-23 के लिए नई दरें निर्धारित करने के लिए टैरिफ याचिका नियामक आयोग के समक्ष पेश कर दी है. जिसमें विभाग द्वारा चार प्रतिशत के लगभग दरें बढ़ाने की तैयारी की है.

बताया जाता जाता है कि बिजली कंपनियों ने 34 हजार करोड़ रुपए की जरुरत बताई है, जिसके चते नियामक आयोग में सुनवाई होगी इसके बाद टैरिफ याचिका को सार्वजनिक करते हुए जनसुनवाई के लिए आपत्तियां आमंत्रित की जाएगी. एमपी की बिजली सप्लाई कंपनियों की ओर से पावर मैनेजमेंट कंपनी ने 01 दिसंबर को नियामक आयोग में टैरिफ याचिका दायर की है. इस बार याचिका में बढ़ाई गई दरों का खुलासा कंपनी ने नहीं किया है. कंपनी अधिकारियों का दावा है कि नियामक आयोग ही प्रस्तावित दरों का खुलासा करेगी. 14 दिसंबर को नियामक आयोग में प्रारंभिक सुनवाई होगी. इसमें याचिका लगाने वाली कंपनी का पक्ष सुना जाएगा.

याचिका में यदि किसी दस्तावेज की कमी होगी तो उसकी पूर्ति के निर्देश दिए जाएंगे. इसके बाद तय होगा कि कब इस टैरिफ याचिका को सार्वजनिक करते हुए इस पर आम लोगों से आपत्तियां बुलवाई जाए. इसके बाद जनसुनवाई होगी. जनसुनवाई वर्चुअल होगी या भौतिक ये बाद में तय होगा. 

जानकारों का मानना है कि बिजली कंपनियों ने बिजली कंपनी ने ड्राफ्ट के आधार पर इस प्रत्याशा में टैरिफ याचिका दायर कर दी है. यह टैरिफ याचिका ही पूरी तरह से वैधानिक नहीं है. पहले रेग्युलेशन नीति तय होना चाहिए था. बिजली कंपनियों ने इसी साल जुलाई में 0.63 प्रतिशत दर बढ़ाए थे. सूत्रों की मानें तो इस बार कंपनियों ने 04 प्रतिशत के लगभग दर बढ़ाने की मांग टैरिफ याचिका में की है.