कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार के खिलाफ हमले कर रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक पीटी सावकिमे ने केंद्र के एक फैसले पर कहा है कि एनडीए सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में नागरिकता विधेयक पर हो रहे विरोध को दबाने के लिए संवैधानिक संशोधनों को मंजूरी दे दी है। 

ज्ञात हो कि केंद्र ने संविधान के अनुच्छेद 280 और छठी अनुसूची के लिए भूमि संशोधन को मंजूरी दी है। इस संशोधन से पूर्वोत्तर के छठे अनुसूची क्षेत्रों में स्वायत्त परिषद के वित्तीय संसाधनों और अन्य शक्तियों में काफी वृद्धि होगी, लेकिन कांग्रेस द्वारा कहा जा रहा है कि भाजपा ने पूर्वोत्तर के आक्रोश को ठंडा करने के लिए यह कदम उठाया है। मीडियाकर्मियों से बात करते हुए सावकिमे ने कहा कि केंद्र में भाजपा ने महसूस किया कि लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित होने के बाद पूर्वोत्तर क्षेत्र में उनकी स्थिति खराब हो गई है। पूर्वोत्तर में भाजपा की जमीनी पकड़ खत्म हो रही है। पार्टी संगठन को बचाने की दिशा में छठी अनुसूची में संशोधन को मंजूरी देने का कार्ड खेला गया है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि केंद्र के इस लाॅलीपाॅप से बात बनने वाली नहीं है। भाजपा ने नागरिकता विधेयक को लागू करने का जो निर्णय लिया है यह गलत है। इससे स्वदेशी नागरिकों की पहचान खत्म हो जाएगी। उनका स्पष्ट रुप से मानना था कि अनुसूची में संशोधन को मंजूरी देने के कैबिनेट के अचानक निर्णय के पीछे एक छिपा हुआ एजेंडा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लंबे समय से छठी अनुसूचि के लिए आवश्यक संशोधन की मांग कर रही थी, लेकिन केंद्र ने कोई ध्यान नहीं दिया।

वहीं केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले पर बोलते हुए विपक्ष के नेता तथा पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने कहा कि मुद्दे और भी है, जिस पर ध्यान केंद्रित किया जाना जरुरी है। सामाजिक व आर्थिक रुप से पिछड़ी जनजातियों के विकास पर बल जितना दिया जाना चाहिए था नहीं हुआ। राज्य में शांति स्थापित रहे इस दिशा में मुख्य धारा में लौटे विद्रोही गुटों की मांगों पर भी गौर करना होगा।


संगमा ने बताया कि केंद्र सरकार से संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद थी और तत्कालीन राज्य सरकार ने आश्वासन दिया था। हालांकि केंद्र धीमी गति से आगे बढ़ रहा है और कई मौकों पर हितधारकों द्वारा इस बारे में नाराजगी व्यक्त की गई थी। इस बीच भाजपा विधायक और कैबिनेट मंत्री एएल हेक ने इस कदम का स्वागत किया है। एक अन्य कैबिनेट मंत्री हेमलेट दोहलिंग ने कहा कि सरकार के निर्णयों का अध्ययन किया जाएगा और इस मुद्दे पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा वे बैठक आयोजन कर समीक्षा करेंगे कि यह फैसला राज्य के लिए फायदेमंद होगा या नहीं।