उज्जैन की शिप्रा नदी को साफ (Shipra river clean और स्वच्छ बनाने की मांग को लेकर महिला कांग्रेस की उपाध्यक्ष नूरी खान (Nuri Khan ) ने से जल सत्याग्रह प्रारंभ किया है. जहां अधिकारियों की समझाइश के दौरान नूरी खान नहीं मानी और प्राण त्यागने के लिए गहरे पानी मे चली गईं. जहां कार्यकर्ताओं ने उन्हें बचाकर अस्पताल पहुंचाया. 

रामघाट पर शिप्रा नदी में उतरकर जल सत्याग्रह करने से पहले नूरी खान ने आरोप लगाया कि बीते 20 साल में सरकार ने शिप्रा को साफ करने और प्रवाहमान रखने के लिए 600 करोड़ रुपए खर्च कर दिए हैं. इसके बाद भी नदी में गंदा पानी मिल रहा है.

सरकार संतों-महंतों की मांग, भावना और श्रद्धालुओं की आस्था पर ध्यान नहीं देकर गंदे पानी को नदी में मिलने से रोकने की नौटंकी कर रही हैं. गंदा पानी रामघाट तक पहुंच रहा है. ऐसे में श्रद्धालु नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं. नदी के नाम पर अब तक करोड़ों खर्च किए गए लेकिन 16 गंदे नालों का पानी तक नदी में मिलने से रोका नहीं गया है.

महिला कांग्रेस की उपाध्यक्ष नूरी खान ने कहा कि नदी को साफ और स्वच्छ बनाने की ठोस योजना बनाने तक आंदोलन जारी रहेगा. इस दौरान मुझे कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और सरकार की होगी. नूरी खान को मनाने पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों की नूरी खान ने एक न सुनी जहां कार्यकर्ता उन्हें गहरे पानी से निकालकर जिला अस्पताल में भर्ती कराने ले गए.