मेघालय के मुख्यमंत्री और एनपीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कोनराड़ के संगमा ने पूर्व मुख्यमंत्री तथा तुरा से कांग्रेस उम्मीदवार डाॅ.मुकुल संगमा के एक बयान की कड़ी आलोचना की। मुख्यमंत्री ने कोयला खनन प्रतिबंध के मुद्दे को लेकर संगमा को घेरा। उन्होंने कहा कि डाॅ.संगमा (कांग्रेस सरकार के समय) नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश को चुनौती देने में विफल रहे, जिसने कोयले खनन पर निर्भर लोगों के लिए बाधा पैदा की। यही नहीं, डाॅ. संगमा पर उनके दुर्भावनापूर्ण रवैए के लिए आरोप लगाया।


उन्होंने कहा कि इस वजह से राज्य में लगाए गए कोयला खनन पर प्रतिबंध ने लोगों को काफी प्रभावित किया है। कोनराड ने कहा कि कोयला खनन पर प्रतिबंध ने राज्य के कोयला समृद्ध क्षेत्रों में लोगों को प्रभावित किया है। बल्कि इससे राज्य के लिए वित्तीय नुकसान भी हुआ है। वर्ष 2014 में एनजीटी ने मेघालय में कोयला खनन पर प्रतिबंध लगा दिया था। वह डाॅ. संगमा से पुछना चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में एनजीटी के आदेश को चुनौती देने में असफल क्यों रहे।वर्ष 2018 में जब एमडीए सत्ता में आया तो सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में पहल शुरू की।


मालूम हो कि कोनराड ने दक्षिण गारों हिल्स में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उपरोक्त बातें कहीं। उन्होंने बताया कि कोयला खनन पर प्रतिबंध को लेकर उतपन्न समस्या समाधान के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ काम किया है और उनकी सरकार लोगों के हितों के लिए इस मुद्दे को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। एनपीपी ने आदेश को चुनौती दी और सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 जब केंद्र सरकार ने मेघालय से खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम में छूट राज्य सरकार से जवाब मांगा था, सरकार जवाब देने में विफल रही है।


डाॅ. संगमा की अपनी रूचि थी, क्योंकि वह मेघालय में कोयला व्यापार के एकाधिकार में लगे हुए थे और लोगों के हितों के लिए चिंतित नहीं थे। वर्ष 2016 में कोयला मंत्रालय एमएमडीआर अधिनियम से मेघालय को छूट देने की नीति पर काम कर रहा था और इस आशय का एक आदेश गृह मंत्रालय द्वारा अंतिम मंजूरी के साथ जारी किया गया था, लेकिन डाॅ.संगमा सरकार कोयला मंत्रालय को जवाब देने में विफल रही। आदेश और पत्र भी गलत लिखा गया था। वह डाॅ.संगमा से पुछना चाहते हैं कि लोगों की चिंताओं को दूर करने में क्यों नाकाम रहे।



मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ. संगमा की सरकार ईमानदार होती और लोगों के लिए चिंता भावना रखती, तो मसला हल हो जाता। अब कांग्रेस उनकी पार्टी (एनपीपी) के खिलाफ वीडियो बना रही है और लोगों के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रही है कि एनीपीपी इस मुद्दे को हल करने में विफल रही है, लेकिन यह तथ्य जनता के सामने है कि वे पूरी ईमानदारी के साथ मेघालय में पर्यावरण और खनन सुरक्षा के मुद्दों को रेखांकित करते हुए फिर से खनन शुरू करने के लिए काम कर रहे है।