नगांव । लोकसभा चुनाव में नगांव संसदीय क्षेत्र के टिकट के लिए कांग्रेस में अंतर्कलह शुरू हो गया है । कांग्रेस सरकार में रहे एक प्रभावशाली मंत्री के सतरंजी चाल से नगांव लोस सीट पर पूर्व मंत्री प्रद्युत बरदलै को उतारने की कोशिश को नगांव के कई कांग्रेसी कार्यकर्ता सहजता से नहीं ले पा रहे हैं  । 

नगांव लोस सीट से प्रद्युत बरदलै का नाम सामने आने से नगांव  कांग्रेस कार्यकर्ताओं में यह चर्चा है कि नगांव संसदीय सीट के लिए पूर्व वरिष्ठ कांग्रेसी केंद्रीय मंत्री विष्णु प्रसाद, पूर्व सदर विधायक डॉ. दुर्लभ चमुवा, वरिष्ठ कांग्रेसी रमेश बरदलै जैसे योग्य उम्मीदवारों के बावजूद तिनसुकिया जिले के माधेरिटा से प्रद्युत बरदलै को लाकर नगांव संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाने की साजिश के पीछे आखिर क्या राज है। 

राजनैतिक बाजार में यह भी चर्चा है कि कलियाबर संसदीय सीट लगभग 2004 से आज तक एक की परिवार के सदस्यों के बीच सिमटकर रह गई है । क्योंकि इस सीट से पहले पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई सांसद रहे । उनके बाद उनके भाई दीप गोगोई सांसद बने ।

 2014 में पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे गोरव गोगोई को सांसद बनाया गया और ये सभी उम्मीदवार ऊपरी असम के थे । इस प्रक्रिया के कारण कलियाबर के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को भाग्य आजमाने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ और इसके कारण कलियाबर में कोंग्रेसी कार्यकर्ता अंदर ही अंदर नाराज चल रहे थे । 

इस बार भी कलियाबर संसदीय सीट जैसा नगांव संसदीय सीट को भी ऊपरी असम के शिकंजे में डालने के षड्यंत्र को काग्रेसी कार्यकर्ता आसानी से नहीं ले पा  रहे हैं । कई लोगों का कहना है कि हर बार नगांव संसदीय सीट को भाजपा की झोली में डालने के मकसद से कांग्रेस योग्य उम्मीदवार को नजरअंदाज कर ऐसे उम्मीदवार का चयन करती है जिसकी जनप्रियता और पकड़ नगांव संसदीय सीट पर नहीं हो ।

 इस बार लोकसभा चुनावी बयार भाजपा के विरुद्ध बहने की आशंका है । इसलिए कई कोंग्रेसी कार्यकर्ताओं का कहना है कि नगांव संसदीय सीट पर नगांव लोस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उम्मीदवार को कांग्रेस टिकट देने में लापरवाही बरतती है तो नगांव संसदीय सीट एक बार फिर भाजपा के खाते में जाने की संभावना बन गई है । खबर यह भी है कि कांग्रेस के संदर्भ में फेस बुक में यह पोस्ट छाया हुआ है कि कलियाबर जैसा नगांव संसदीय सीट को ऊपरी असम का खुला मैदान नहीं बनने देंगे । इस पोस्ट को लेकर भी कांग्रेस का चुनावी बाजार गर्म है ।