मेघालय में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। 21 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। मणिपुर में धोखा खा चुकी कांग्रेस ने इस बार सबक लेते हुए तुरंत सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। जल्द ही कांग्रेस के विधायक दल की मीटिंग होगी, जिसमें सभी विधायक अपना नेता चुनेंगे और मुख्यमंत्री पद के लिए उसका नाम आगे किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि मुकुल संगमा के नाम पर ही फिर से मुहर लगेगी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ, सीपी जोशी और अहमद पटेल ने शनिवार को  मेघालय के राज्यपाल गंगा प्रसाद से मुलाकात की। मीटिंग के बाद कमलनाथ ने कहा, हमने राज्यपाल से मुलाकात की। कांग्रेस विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। हम चाहते हैं कि कांग्रेस को सरकार बनाने का न्योता मिले। लोगों की आवाज का सम्मान किया जाना चाहिए। भाजपा ने केवल 2 सीटें जीती है। जाहिर है कि जनता ने उन्हें खारिज कर दिया है। कांग्रेस सरकार बनाने के अपने प्रयास में मेघालय के सभी क्षेत्रीय दलों के संपर्क में है।

उन्होंने भाजपा पर धनबल का इस्तेमाल कर कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखने की कोशिश का आरोप लगाया। कमलनाथ ने कहा कि त्रिपुरा में भाजपा ने वाममोर्चा को सत्ता से बेदखल कर दिया है लेकिन त्रिपुरा की जनता को जल्द ही समझ में आ जाएगा कि उनको गहरा आघात लगने वाला है। कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस त्रिपुरा में मुख्य मुकाबले में नहीं थी। मेघालय कांग्रेस के वर्किंग प्रेसिडेंट और लोकसभा सांसद विंसेंट एच.पाला ने कहा, हमें भरोसा है कि क्षेत्रीय पार्टियों के सहयोग से सरकार बना लेंगे। मुकुल संगमा ने कहा,जो नतीजे आए हैं, उसमें खंडित जनादेश मिला है। अब लोगों को देखना है कि उन्हें कैसी सरकार चाहिए। भाजपा या अन्य क्षेत्रीय पार्टियों ने चुनाव से पहले कोई गठबंधन नहीं किया था। उन्होंने अकेले चुनाव लड़ा। लिहाजा कांग्रेस ही सबसे बड़ी पार्टी है।

आपको बता दें कि जब मेघालय के विधानसभा चुनाव के रुझानों में यह स्पष्ट हो गया कि वहां कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने जा रहा है तब कांग्रेस के दो दिग्गज नेता अहमद पटेल और कमलनाथ तुरंत  शिलॉन्ग के लिए रवाना हो गए। दोनों नेता यहां खंडित जनादेश के बीच प्रदेश में सरकार बनाने की कोशिश में जुटे हैं। आपको बता दें कि मणिपुर के विधानभा चुनाव में कांग्रेस 28 सीटें जीकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी, फिर भी वह सरकार नहीं बना पाई। 21 सीटें जीतने वाली भाजपा ने एनपीपी व अन्य दलों के समर्थन से एन.बीरेन सिंह के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बना ली थी।