नई दिल्ली । कांग्रेस ने असम में नागरिकों के नाम वाले राष्टीय नागरिक रजिस्टर ( एनआरसी ) के कल जारी पहले मसौदे को 1985 में राज्य में शांति बहाली की पहल की अगली कड़ी बताते हुए आज कहा कि इस काम में किसी भी नागरिक के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा । 

कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने यहां जारी एक बयान में कहा कि 1985 में त्तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने असम में फैली हिंसा,खत्म करने के लिए शांति समझौता किया था । 

फिर 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, असम के तत्कालीन  मुख्यमंत्री तरुण गोगोई तथा असम गण परिषद के बीच त्रिपक्षीय समझौते के तहत एनआरसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ने की पहल हुई और दिसम्बर 2013 से उच्चतम न्यायालय की निगरानी में यह कार्य चल रहा है। 

इसका पहला मसौदा 31 दिसंबर की आधी रात को प्रकाशित किया गया । नागरिकों की पहचान के काम में पारदर्शिता क्या विश्वसनीयता बरतने की मांग करते हुए उन्होंने वहा कि यह कार्य पूरी जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए और हर नागरिक की जांच- पड़ताल की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए । 

इस में किसी नागरिक को  दस्तावेजों के बहाने प्रताडित करने या उनके उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जानाम चाहिए । कांग्रेस पार्टी समाज के सभी वर्गों के साथ न्याय की पक्षधर है और इस कार्य में असम के किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा । 

असम में एनआरसी का पहला मसौदा रविवार को जारी किया गया है और इसमे सिर्फ 1.9 करोड़ लोगों को ही अब तक भारत का वैध नागरिक माना गया है । बाकी लोगों के नाम पंजीयिका में चढ़ने के लिए उनके नाम का सत्यापन विभिन्न चरणों में किया जाना है । एनआरसी का मसौदा वर्ष 2018 के पूर्ण रूप से बनकर तैयार किया जाना है । इससे पहले वर्ष 1951 में यह पंजिका तैयार की गई थी । असम में अवैध प्रवासियों को ढूंढ़ने का काम चल रहा है ।