कांग्रेस के पूर्व विधायक और अब भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार आशीष कुमार शाह ने आरोप लगाया कि पार्टी हाईकमान तथा शीर्ष नेताओं सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के कारण राज्य में पार्टी दुविधा की स्थिति में है तथा इसने भाजपा को अपना स्थान दे दिया है। 

कांग्रेस की परंपरागत अगरतला शहर में स्थित बोर्दावेली सीट से भाजपा उम्मीदवार के रुप में इस बार चुनाव लड़ रहे शाह ने यहां कहा, 'कांग्रेस हाईकमान ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रति नरम रुख अपनाए रखा और धीरे-धीरे ईच्छाशक्ति को त्याग दिया। ऐसी स्थिति में पार्टी का गिरावट अवश्यंभावी था।'

गौरतलब है कि शाह समेत कांग्रेस के छह विधायकों ने पार्टी की सदस्यता त्याग कर पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्ववाली तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और बाद में वे भाजपा में आ गये। शाह ने कहा, 'धूर विरोधी वाम तथा कम्युनिस्टों के खिलाफ लड़ाई के दौरान हमें केंद्रीय नेताओं से समर्थन और उत्साहवद्र्धन की उम्मीद होती है, लेकिन शायद ही कभी हमें किसी प्रकार का समर्थन मिला।'

शाह ने कहा कि सबसे हास्यास्पद स्थिति 2013 चुनाव के दौरान हुई जब माकपा नेताओं के साथ राष्ट्रीय स्तर पर संबंध सुधारने के नाम पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी माकपा के विरुद्ध चुनाव प्रचार करने तक नहीं आयीं। उन्होंने कहा, 'यह किसी भी शीर्ष नेता का अनुचित काम था। फिर भी हमने चुनाव लड़ा और अपनी ताकत के बल पर जीत हासिल की।'

शाह ने बताया कि एकसमय कांग्रेस छोडऩे वाले सभी छह पूर्व विधायकों ने ममता बनर्जी में आस्था व्यक्त की थी क्योंकि वह मजबूत वामपंथी विरोधी का वास्तविक विकल्प के तौर पर नजर आ रही थीं। उन्होंने कहा, 'लेकिन 2017 के बाद से ममता बनर्जी ने अपनी लाईन बदल दी है। नोटबंदी के दौरान वह माकपा के करीब गयीं तथा राष्ट्रपति चुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने माकपा के साथ ही वोट की आश्चर्य में डाल दिया।'

शाह ने भाजपा में शामिल होने और इसके उम्मीदवार के रूप में चुनाव लडऩे को उचित ठहराते हुए कहा, 'इस प्रकार कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वामपंथियों का नापाक गठबंधन उजागर हो गया है और इसने हमें अन्य विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया।'

भाजपा के हिंदुत्व की ओर झुकाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कम्युनिस्टों के अभियान की वजह से भाजपा के बारे में इस प्रकार की धारणाएं हैं। उन्होंने कहा, 'वामपंथी लोगों को अधिकार देने में विश्वास नहीं करते और ना ही धर्मनिरपेक्षता में उनका कोई विश्वास है। चीन में हज यात्रा पर जाने वाले मुस्लिमों को वीजा नहीं दी जाती तथा अपने देश में वे दूसरों को धर्मनिरपेक्षता का प्रमाणपत्र देते हैं।'

शाह ने कहा, 'अब मैं भाजपा से जुड़ा हूं, मुझे इसके बारे में कुछ भी सांप्रदायिक या हिंदुत्ववादी भेदभाव नहीं मिला है।'