पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत प्रणब मुखर्जी ने अपने संस्मरण ‘द प्रेसिडेंशियल ईयर्स’ में कांग्रेस पार्टी को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं। मुखर्जी अपने निधन से पहले ‘द प्रेसिडेंशियल ईयर्स’ लिख चुके थे। यह पुस्तक जनवरी, 2021 से पाठकों के लिए उपलब्ध होगी। इस पुस्तक में पश्चिम बंगाल के एक गांव में बिताए बचपन से लेकर राष्ट्रपति रहने तक उनके लंबे सफर पर रोशनी डाली गई है। अपने संस्मरण में प्रणब मुखर्जी ने लिखा कि उनके सर्वोच्च संवैधानिक पद पर चुने जाने के बाद कांग्रेस राजनीतिक दिशा से भटक गई।

कोरोना वायरस संक्रमण के बाद हुई स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण गत 31 जुलाई को 84 वर्ष की आयु में प्रणब मुखर्जी का निधन हो गया था। इस पुस्तक में मुखर्जी ने लिखा है कि कुछ पार्टी सदस्यों का यह मानना था कि अगर 2004 में वह प्रधानमंत्री बनते तो 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस करारी हार वाली स्थिति में नहीं आती। हालांकि इस राय से मैं इत्तेफाक नहीं रखता। मैं यह मानता हूं कि मेरे राष्ट्रपति बनने के बाद पार्टी नेतृत्व ने राजनीतिक दिशा खो दी। सोनिया गांधी पार्टी के मामलों को संभालने में असमर्थ थीं, तो मनमोहन सिंह की सदन से लंबी अनुपस्थिति से सांसदों के साथ किसी भी व्यक्तिगत संपर्क पर विराम लग गया।

पूर्व राष्ट्रपति ने लिखा, मेरा मानना है कि शासन करने का नैतिक अधिकार प्रधानमंत्री के साथ निहित होता है। देश की संपूर्ण शासन व्यवस्था प्रधानमंत्री और उनके प्रशासन के कामकाज का प्रतिबिंब होती है। डॉ. सिंह गठबंधन को बचाने में ध्यानमग्न रहे जिसका शासन पर असर हुआ, जबकि नरेंद्र मोदी अपने पहले कार्यकाल में शासन की अधिनायकवादी शैली को अपनाए हुए प्रतीत हुए जो सरकार, विधायिका और न्यायपालिका के बीच तल्ख रिश्तों के जरिए दिखाई दी।