विधानसभा चुनाव लड़ रहे सुर्खियों में रहने वाले गाैरव वल्लभ, राधाकृष्ण किशाेर, कुंदन पाहन, पाैलुस सुरीन समेत 971 प्रत्याशियों की जमानत राशि चुनाव आयोग ने जब्त कर ली है। कुल 1216 प्रत्याशियों में से सिर्फ 243 ही जमानत राशि बचा पाए। जिनकी जमानत जब्त हुई है, उनमें झामुमो के तीन, कांग्रेस के छह और राजद के एक प्रत्याशी समेत 21 दलों के प्रत्याशी और निर्दलीय शामिल हैं। यानी इस चुनाव में 81% प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त हो गई।


इस मामले में बड़ी चोट झाविमो को पहुंची है, जिसने सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। झाविमो के 75 प्रत्याशियों की जमानत नहीं बची। आजसू ने 53 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 38 की जमानत नहीं बची। भाजपा के भी 6 प्रत्याशियों ने जमानत गंवा दी। जिन प्रमुख नेताओं की जमानत जब्त हुई, उनमें मुख्यमंत्री रघुवर दास काे चुनाैती देने वाले कांग्रेस प्रत्याशी गाैरव वल्लभ, पूर्व मंत्री चंद्रशेखर दुबे, राधाकृष्ण किशाेर, झाविमाे के सबा अहमद, आजसू के राजकिशाेर महताे, पूर्व नक्सली कुंदन पाहन, विधायक पाैलुस सुरीन और समाजसेवी दयामनी बारला भी शामिल हैं। इन नेताओं काे विधानसभा में पड़े कुल मताें का छठा हिस्सा भी नहीं मिला।

 
 
हर बार विधानसभा चुनाव में 1100 से अधिक प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमाते हैं, पर इनमें 900 से अधिक की जमानत जब्त हो जाती है। पिछले तीन विधानसभा चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि राज्य की 81 सीटों के लिए वर्ष 2005 में 1390 प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें 1206 (86.76) की जमानत जब्त हो गई थी। वहीं 2009 में 1491 प्रत्याशी खड़े हुए थे। इनमें से 1299 (87.12) जमानत राशि नहीं बचा पाए थे। इसी तरह वर्ष 2014 में कुल 1136 प्रत्याशियों में से 947 (83.36) की जमानत जब्त हो गई थी। पिछले तीनों विधानसभा चुनाव में 83 प्रतिशत से अधिक प्रत्याशी चपेट में आए थे।
 

जब काेई प्रत्याशी किसी भी चुनाव क्षेेत्र में पड़े कुल वैध वाेट का छठा हिस्सा हासिल नहीं कर पाता है, ताे उसकी जमानत राशि जब्त मानी जाती है। नामांकन के दाैरान जाे राशि उसने आयाेग काे दी थी वह राशि उन्हें वापस नहीं मिलती है।