नागालैंड में भाजपा और एनडीपीपी को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस ने सभी विकल्प खुले रखे हैं। कांग्रेस की सत्तारुढ़ नगा पीपुल्स फ्रंट(एनपीएफ) के साथ बैक चैनल वार्ता चल रही है। एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई है।

कहा जा रहा है कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव के बाद एनपीएफ से गठबंधन करने के लिए तैयार है। आपको बता दें कि नागालैंड में विधानसभा की कुल 60 सीटें हैं। इनमें से 59 सीटों के लिए मंगलवार को मतदान होगा। नॉर्दर्न अंगामी-2 सीट पर एनडीपीपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार नेफ्यू रियो निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं इसलिए 59 सीटों पर चुनाव हो रहा है।

एनपीएफ ने कुल 58 उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने 23 उम्मीदवारों को टिकट दिया था लेकिन पांच उम्मीदवारों के नाम वापस लेने के कारण अब 18 उम्मीदवार ही चुनाव मैदान में हैं। नागालैंड में नागालैंड डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी(एनडीपीपी) और भाजपा ने चुनाव पूर्व गठबंधन किया है। एनडीपीपी 40 जबकि भाजपा 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

कांग्रेस सत्तारुढ़ एनपीएफ के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं कर पाई लेकिन भाजपा और एनडीपीपी को सत्ता से दूर रखने के लिए चुनाव बाद एनपीएफ के साथ गठबंधन के लिए बैक चैनल वार्ता चल रही है। कांग्रेस के एक नेता ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी। इस नेता ने कहा, 3 मार्च को चुनाव के नतीजों के बाद अगर जरूरत हुई तो एनपीपी के साथ भी गठबंधन किया जा सकता है।

इस बीच ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी(एआईसीसी) के चुनाव पर्यवेक्षक प्रवीण डावर ने कहा, नागालैंड में धर्मनिरपेक्ष सरकार सत्ता में आएगी। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस को 10 से 12 सीटें मिलेगी। कांग्रेस का मौजूदा विधानसभा में एक भी सदस्य नहीं है। दो साल पहले कांग्रेस के आठ विधायक थे लेकिन ये सभी सत्तारुढ़ एनपीएफ में शामिल हो गए।

कांग्रेस के चुनाव पर्यवेक्षक ने कहा कि हम इस बार डबल डिजिट प्राप्त करने जा रहे हैं। हम यहां निर्णायक ताकत होंगे क्योंकि राज्य के लोग धर्मनिरपेक्ष सरकार चाहते हैं। भाजपा के खिलाफ स्ट्रॉन्ग अंडरकरंट है। आपको बता दें कि नागालैंड में कांग्रेस 15 साल से सत्ता से दूर है। 2003 के बाद से यहां कांग्रेस कभी सत्ता में नहीं आई। 2003 में भाजपा ने एनपीएफ से गठबंधन किया था। यह गठबंधन 15 साल चला लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों ने 15 साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया।