पूर्वोत्तर के तीनों राज्यों के विधानसभा चुनाव सबसे बुरा हाल कांग्रेस का हुआ है। त्रिपुरा और नागालैंड में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला वहीं मेघालय में वह बहुमत के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई जबकि उसे सत्ता में वापसी का पूरा भरोसा था। त्रिपुरा में जहां भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन की सरकार बनने जा रही है वहीं नागालैंड में एनडीपीपी-भाजपा अलायंस को सत्ता मिली है।

नागालैंड में इस बार मुख्य मुकाबला नगा पीपुल्स फ्रंट(एनपीएफ) और एनडीपीपी-भाजपा गठबंधन के बीच था। भाजपा ने एनपीएफ से 15 साल पुराना गठबंधन तोड़  कर एनडीपीपी से हाथ मिलाया जो हाल ही में बनी थी। भाजपा ने 20 जबकि एनडीपीपी ने 40 पर चुनाव लड़ा। एनडीपीपी ने नेफ्यू रियो को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया, जो तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

नेफ्यू रियो ने नॉर्दर्न-2 अंगामी सीट से निर्विरोध चुनाव जीत लिया। कांग्रेस ने 23 उम्मीदवारों को टिकट दिया था लेकिन पांच ने नाम वापस ले लिया। इस कारण कांग्रेस 18 सीटों पर ही चुनाव लड़ पाई। आपको बता दें कि नागालैंड में कांग्रेस 2003 से सत्ता से बाहर है। कांग्रेस ने राज्य में पहली बार 1977 में विधानसभा चुनाव लड़ा था। उस समय कांग्रेस ने 37 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे लेकिन इनमें से 15 ही जीत पाए थे।

नागालैंड में विधानसभा की कुल 60 सीटें हैं। इनमें से 59 सीटें एसटी के लिए रिजर्व है। नागालैंड में कांग्रेस ने लगातार चार बार पूर्ण बहुमत की सरकारें बनाई है। 1998 के विधानसभा चुनाव में तो कांग्रेस ने रिकॉर्ड तोड़ जीत दर्ज की थी। उस समय कांग्रेस को 60 में से 53 सीटें मिली थी। 1982 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सभी 60 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन उसे पूर्ण बहुमत नहीं मिला। कांग्रेस 24 सीटों पर ही सिमट गई। 1987 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को पहली बार पूर्ण बहुमत मिला। उसने 34 सीटें जीती। 1989 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने सभी 60 सीटों पर चुनाव लड़ा। उसे 36 सीटें मिली।

1993 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 59 सीटों पर चुनाव लड़ा। इस बार भी कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला। उसने 35 सीटों पर जीत दर्ज की। 1998 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जबरदस्त जीत हुई। कांग्रेस ने 60 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। उसे 53 सीटें मिली। 1998 के बाद कांग्रेस की सीटें कम होती गई। 2013 के विधानसभा चुनाव में तो कांग्रेस सिर्फ 8 सीटों पर ही सिमट गई। ये 8 विधायक बाद में एनपीएफ में शामिल हो गए थे। 2003 में कांग्रेस को 21 सीटें मिली थी। 2008 में कांग्रेस ने सभी 60 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। इनमें से 23 ही जीत दर्ज कर पाए।