देश के 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार से उभरते असंतोष के सुर थामने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने इसकी समीक्षा के लिए तत्काल एक समिति बनाने का भी एलान किया है। वहीं, पश्चिम बंगाल के कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने मंगलवार को कहा कि भविष्य में वह इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के साथ किसी तरह का कोई संबंध नहीं रखना चाहते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस असम में भी क्या ऐसे ही बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF के साथ रुख अख्तियार करेगी, क्योंकि दोनों के साथ गठबंधन करने का कोई सियासी फायदा पार्टी को चुनाव में नहीं मिला है।

कांग्रेस कार्यसमिति की सोमवार को हुई बैठक में कुछ नेताओं ने पांच राज्यों में हार के लिए गठबंधन को लेकर पार्टी की विरोधाभासी नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गुलाम नबी आजाद ने बंगाल में इंडियन सेक्युलर फ्रंट के साथ गठबंधन के फैसले पर सवाल उठाया और कहा कि चाहे राज्यों के स्तर पर हो या राष्ट्रीय स्तर पर इसको लेकर एक स्पष्ट नीति होनी चाहिए। इस पर विचार-विमर्श के लिए पार्टी का एक तंत्र होना चाहिए जो आम सहमति से गठबंधन पर निर्णय ले सके।

गुलाम नबी आजाद ने सवाल उठाया कि आखिर ISF के साथ गठबंधन कर कांग्रेस ने लोगों के बीच और राजनीतिक लिहाज से भी ममता बनर्जी के लिए क्या संदेश दिया। इसी तरह असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआइयूडीएफ के साथ गठबंधन को लेकर भी काफी तीखे सवाल उठाए गए। हालांकि, गठबंधन के पूर्व भी कांग्रेस के बागी नेताओं ने बंगाल में अब्बास सिद्दीकी के साथ हाथ मिलाने को लेकर सवाल खड़े किए थे, लेकिन तब अधीर रंजन चौधरी ने ही अपने नेताओं पर पलटवार कर दिया था।

वहीं, अब बंगाल चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि भविष्य में अब्बास सिद्दीकी की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट के साथ वह कोई संबंध नहीं रखना चाहते हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी पार्टी कभी ISF के साथ गठबंधन करने नहीं गई थी, वाममोर्चा उनसे मिला था। अधीर रंजन ने कहा कि मैंने उनसे (वाममोर्चा) ऐसा नहीं करने को कहा था, लेकिन उन्होंने कहा कि वे वादा कर चुके हैं। चौधरी ने कहा कि चूंकि कांग्रेस और वाममोर्चा के बीच पहले से साझेदारी थी, इसलिए संयुक्त मोर्चा का गठन हुआ. उन्होंने कहा कि मोर्चे का असफल होना तय था क्योंकि बंगाल के लोगों ने गठबंधन को स्वीकार करने से इंकार कर दिया।

बता दें कि बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, वाममोर्चा और ISF का संयुक्त मोर्चा किसी तरह का सियासी कमाल दिखाने में असफल रहा। गठबंधन को राज्य में सिर्फ एक सीट मिली और वह भी इस्लामिक धर्मगुरु द्वारा जनवरी में गठित पार्टी (ISF) के हिस्से में गई। कांग्रेस और लेफ्ट का बंगाल से पूरी तरह सफाया हो गया है। कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि मैं कभी नहीं चाहूंगा कि ISF ऐसे किसी गठबंधन का हिस्सा बने जहां हम भी हों। अधीर रंजन को यह बात अब समझ आई है जब पार्टी को बंगाल में एक भी सीट नहीं मिली।