लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस पहली बार ताकत के साथ केन्द्र सरकार के खिलाफ 14 दिसंबर को नई दिल्ïली में रैली करने जा रही है। नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर पूर्वी क्षेत्र में चल रहे प्रदर्शन को कांग्रेस बड़ा हथियार बनाने जा रही है। इसके अलावा उन्नाव, हैदराबाद समेत अन्य इलाकों में हुई बलात्कार की घटनाओं, अर्थव्यवस्था की बदहाली और महंगाई जैसे मुद्दों को फोकस कर आमजन को जोडऩे की कोशिश की जा रही है। वहीं रैली में दिल्ïली से सटे राजस्थान समेत अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने में कांग्रेस नेता जुटे हुए हैं।

लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस अपनी जमीन फिर से तैयार करने में लगी हुई है। इसी कड़ी में पहले जिले और प्रदेशों में केन्द्र के खिलाफ प्रदर्शन किए गए और अब राजधानी में बड़ी रैली होने वाली है। रैली की तैयारियों के लिए रामलीला मैदान का कांग्रेस नेताओं ने बुधवार को जायजा लिया। इस दौरान संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि जह जनजागृति रैली होगी। इन दिनों नॉर्थ-ईस्ट के लोगों में केन्द्र के खिलाफ गुस्सा है। इसके विरोध में लोग सड़को पर उतर रहे हैं। कांग्रेस भी इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रही है, लेकिन गृहमंत्री कह रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी मिस इंफॉर्मेशन फैला रही है कि ये भारतीय मुस्लिमों के खिलाफ है। जबकि हकीकत में गृह मंत्री भ्रांति फैला रहे हैं। वहीं महासचिव मुकुल वासनिक ने कहा कि 14 दिसम्बर को होने वाली भारत बचाओ रैली की तैयारी जोर-शोर से चल रही हैं। ये ऐतिहासिक रैली रहेगी। भारत का आम नागरिक आज परेशानियों से जूझ रहा है, उसकी पूरी जिंदगी तहस-नहस हो गई है। भारत सरकार अस्तित्व में है या नहीं है इस तरह की अब चर्चा होने लग गई है।

राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और हाल में नगरीय निकायों के चुनावों में जीत मिली है। ऐसे में कांग्रेस को यहां से बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उपमुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट, प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे की पिछले दिनों दिल्ली में अहमद पटेल समेत अन्य नेताओं के साथ बैठक हुई थी। इसमें करीब 50 हजार लोगों का राजस्थान से रैली में शामिल होने का लक्ष्य रखा गया।