असम साहित्य सभा ने केंद्रीय विद्यालय संगठन, नई दिल्ली के संयुक्त आयुक्त डा.इ प्रभाकरण पर मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं को खत्म करने का गंभीर आरोप लगाया है। असम साहित्य सभा के अध्यक्ष डा.परमानंद राजवंशी ने केंद्रीय विद्यालयों में असमिया और क्षेत्रीय भाषाओं का नियमित पाठदान शुरू किए जाने की मांग की है।

डा. राजवंशी ने कहा कि यह बात याद रखी जानी चाहिए कि मातृभाषा जातीय जीवन की बुनियाद होती है और किसी भी सरकारी स्तर पर आधुनिक भाषा का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। इस संदर्भ में असम साहित्य सभा ने मानव संसाधन मंत्रालय को एक पत्र प्रेषित कर उनकी उक्त मांग को पूरी करने को कहा है। मालूम हो कि डा. प्रभाकरण ने अपने एक पत्र में कहा कि किसी विद्यालय की कक्षा में यदि 15 अथवा इससे अधिक विद्यार्थी अतिरिक्त भाषा अर्थात क्षेत्रीय भाषा का पाठ्यक्रम लेना चाहें तो विद्यालय के अन्य विषयों के पाठदान के नियमित समय सूची को छोड़ अलग से अतिरिक्त समय में पाठदान की व्यवस्था रहेगी।


यानि कि विद्यालय में विभिन्न विषयों के नियमित पाठदान से पहले ही अतिरिक्त भाषा के पाठदान की व्यवस्था रहेगी।