बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वाकांक्षी 'जल-जीवन-हरियाली' अभियान की झांकी को इस बार दिल्ली के राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल नहीं किए जाने पर टिप्पणी करते हुए आज कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा का न तो कोई मतलब है और न ही इससे परेशान होने की जरूरत है।


कुमार ने यहां बेलदौर प्रखंड के तेलिहार में जल-जीवन-हरियाली यात्रा के तहत जागरूकता सम्मेलन में 2300 करोड़ रुपये की लागत वाली 368 विभिन्न विकासात्मक योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करने बाद कहा, 'कुछ लोग इस पर बिना मतलब की चर्चा में लगे हैं कि 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) को दिल्ली के राजपथ पर होने वाली परेड में जल-जीवन-हरियाली अभियान की झांकी नहीं दिखाई जायेगी, ऐसे प्रश्नों का क्या मतलब है। देश में कई अन्य काम किये जा रहे हैं जिसे गणतंत्र दिवस की झांकी में दिखाया जायेगा। बिहार से संबंधित चीजों को भी पहले गणतंत्र दिवस की झांकी में दिखाया जाता रहा है। इस पर परेशान होने की जरूरत नहीं है।'


मुख्यमंत्री ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान को जो समझेगा वही इसे मानेगा और हम सब मिलकर इस अभियान को सफल बनायेंगे। उन्होंने कहा कि 19 जनवरी को जल-जीवन-हरियाली अभियान तथा शराबबंदी एवं नशामुक्ति के पक्ष में जबकि बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ जब पूरे बिहार के लोग एक-दूसरे का हाथ पकड़कर अपनी प्रतिबद्धता प्रकट करेंगे तो देश ही नहीं पूरी दुनिया के लोग इससे प्रेरित होंगे।


कुमार ने कहा कि वर्ष 2017 में 21 जनवरी को शराबबंदी के पक्ष में चार करोड़ लोगों ने जबकि 21 जनवरी 2018 को बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ 14 हजार किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनायी थी, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। अब एक बार फिर 19 जनवरी 2020 को दिन के साढ़े 11 बजे आधे घंटे के लिए दहेज प्रथा एवं बाल विवाह के खिलाफ जबकि शराबबंदी और जल-जीवन-हरियाली अभियान के पक्ष में मानव श्रृंखला का कार्यक्रम सुनिश्चित किया गया है। सबकी भागीदारी से इस बार बनने वाली मानव श्रृंखला पूर्व में बनी सभी मानव श्रृंखला के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगी।