उत्तराखंड में मुख्यमंत्री कुर्सी को लेकर घमासान चल रहा है। सीएम त्रिवेंद सिंह रावत दिल्ली तलब कर रहे हैं। रावत ने आलाकमान के सामने रखा जिसके कारण से सियासी गलियारों में यह चर्चा है कि सीएम त्रिवेंद सिंह मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ सकते हैं। उनकी जगह इस रेस में कई नाम चल रहे हैं, जिनमें अजय भट्ट, अनिल बलूनी और सतपाल महाराज सबसे आगे हैं। बता दें कि कई बार मुख्यमंत्री त्रिवेंद सिंह की हटने की चर्चा हुई थी।



लेकिन अब इस बार सीएम त्रिवेंद सिंह सच में कुर्सी छोड़ सकते हैं। इनकी जगह अजय भट्ट सीएम की कुर्सी संभाल सकते हैं क्योंकि अजय भट्ट को लेकर काफी चर्चा हो रही है। बता दें कि अजय भट्ट अभी नैनीताल-उधमनगर सीट से लोकसभा सांसद हैं। मूल रूप से हल्द्वानी के निवासी अजय भट्ट शुरुआत से ही बीजेपी के कार्यकर्ता रहे हैं। बीजेपी की सरकार में वह कई विभागों के मंत्री भी रहे हैं। साथ ही 2015 में उन्हें उत्तराखंड बीजेपी की कमान सौंपी गई थी। इसलिए  कयास लगाए जा रहे हैं कि अजय भट्ट सीएम की कुर्सी पर हो सकते हैं।


अनिल बलूनी की बात करें तो अनिल बलूनी का नाम भी कुर्सी की रेस में आगे चल रही है। राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं। खास बात यह है कि बीजेपी के दिग्गज नेता दिवंगत अरुण जेटली और रवि शंकर प्रसाद के बाद बलूनी पार्टी के ऐसे नेता हैं, जिनको राष्ट्रीय संगठन के मीडिया प्रमुख के साथ मुख्य प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी गई है। जिससे कारण से कयास लगाए जा रहे हैं कि सीएम की कुर्सी अनिल बलूनी को मिल सकती है।


इसी तरह सीएम की कुर्सी में सतपाल महाराज का भी नाम रेस में आ रहा है। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की उत्तराखंड में काफी अच्छी पकड़ है और साथ ही देवगौड़ा और गुजराल सरकार में वह केंद्रीय राज्यमंत्री रह चुके हैं। खास बात यह है कि 2017 में चौबट्टाखाल सीट से विधायक होने के साथ ही वह त्रिवेंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बने थे। राजनीतिक हस्ती के साथ-साथ वह आध्यात्मिक गुरु भी हैं। उत्तराखंड की रग से वाकिफ होने के कारण कयास लगाए जा रहे हैं कि कुर्सी इनके हिस्से में भी आ सकती है।