भारत में कोविड-19 के शुरुआती दौर में तबलीगी जमात पर पिछले साल हुई रिपोर्टिंग के मामले में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमण ने कहा, वेब पोर्टल पर किसी का नियंत्रण नहीं हैं।  कुछ भी चल जाता है।  इसके जवाब में ASG ने कहा कि वेब पोर्टल के लिए सरकार ने नियम बनाए हैं जिनको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और मामला लंबित है। 

सुनवाई के दौरान एसजी ने कहा, कृपया मुझे 2 सप्ताह का समय दें।  हमें एक दस्तावेज दाखिल करने की आवश्यकता है।  इस पर  CJI ने कहा, ‘केस फाइल से पता चलता है कि आप पहले ही 4 बार दस्तावेज़ दाखिल करने के लिए स्थगन ले चुके हैं।  इसके जवाब में एसजी ने कहा, ‘हां, लेकिन एक मामले में दस्तावेजों को अभी भी दाखिल करने की आवश्यकता है। 

सुप्रीम कोर्ट ने वेब पोर्टल, यू ट्यूब चैनल और सोशल मीडिया में चलने वाली फर्जी खबरों पर चिंता जताई।  चीफ जस्टिस ने कहा- उन पर कोई नियंत्रण नहीं है।  वह बिना किसी जिम्मेदारी के आम लोगों, जजों और अलग-अलग संस्थाओं को बदनाम करने वाली खबरें चलाते हैं।  कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियां सिर्फ ताकतवर लोगों की ही सुनती हैं जजों, संस्थानों या आम लोगों की नहीं। 

कोर्ट ने कहा कि वे हमें कभी जवाब नहीं देते और संस्थाओं के खिलाफ बहुत बुरा लिखते हैं.अदालत लोगों के लिए तो भूल जाएं वह जजों के लिए भी कहते हैं।  CJI की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि हमारा अनुभव यह रहा है कि वे केवल वीआईपी की आवाज सुनते हैं।  उन्होंने कहा कि आज कोई भी अपना टीवी चला सकता है।  Youtube पर देखा जाए तो एक मिनट में इतना कुछ दिखा दिया जाता है। 

सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या इससे निपटने के लिए कोई तंत्र है? कोर्ट ने कहा कि आपके पास इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और अखबारों के लिए तो व्यवस्था है, लेकिन वेब पोर्टल के लिए कुछ करना होगा।  इसके साथ ही अदालत ने तब्लीगी मामले में जमीयत की याचिका पर कहा कि मीडिया के एक वर्ग में दिखायी जाने वाली खबरों में साम्प्रदायिकता का रंग होने से देश की छवि खराब हो सकती है।