केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर आंदोलन की अगुवाई कर रहे ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) से कहा है कि केंद्र बातचीत के जरिए यह मुद्दा सुलझाना चाहता है। छात्रों के संगठन ने शुक्रवार को यहां एक बयान जारी कर यह जानकारी दी।


सिंह से बातचीत में एएएसयू और एनईएसओ के प्रमुख सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य ने जोर देकर कहा कि स्थानीयों लोगों को प्रभावित करने वाला और विशेष रूप से बांग्लादेशियों को बचाने वाला यह विधेयक असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र की जनता की इच्छा के अनुसार वापस लिया जाना चाहिए।


एनईएसओ पूर्वोत्तर राज्यों के प्रमुख छात्र संगठनों का वृहद संगठन है। भट्टाचार्य ने कहा कि 1985 के ऐतिहासिक असम समझौते को लागू करके ही नागरिता संशोधन के ज्वलंत मुद्दे का समाधान किया जा सकता है।


क्या है यह विधेयक

यह विधेयक हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी व ईसाइयों को, जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के भारत आए हैं, या जिनके वैध दस्तावेजों की समय सीमा हाल के सालों में खत्म हो गई है, उन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाता है। यह विधेयक बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के छह गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक समूहों के लोगों को भारतीय नागरिकता हासिल करने में आ रही बाधाओं को दूर करने का प्रावधान करता है।


विधेयक पर बवाल
इस विधेयक को लेकर असम में बड़ा बबाल मचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की ओर से इसपर लोकसभा में रिपोर्ट पेश किए जाने के तुरंत बाद विधेयक को मंजूरी दे दी। उसके बाद लोकसभा में भी यह विधेयक पारित हो चुका है। राज्यसभा में इसे पास किया जाना बाकी है। शीत सत्र में यह पास तो नहीं हो सका लेकिन आगामी बजट सत्र में इसके पारित होने की संभावना है। बजट सत्र 31 दिसंबर से शुरू हो रहा है।