असम में नागरिकता संशोधन बिल का विरोध धीरे-धीरे जोर पकड़ता जा रहा है। बिल के विरोध में राजनेताओं व संगठनों का गुस्सा सर चढ़कर वो रहा हैं। वित्त मंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने गुस्से में पूरे राज्य में नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ विरोधी तत्वों को दुर्व्यवहार करने और उकसाने के लिए यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के वार्ता विरोधी गुट पर को जिम्मेदार ठहराया है।


हिमंत ने कहा कि उल्फा-आई सीधे तौर पर बिल के विरोध में भूमिका निभा रहा है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए हिमंत ने कहा कि सरकार भी तथ्यों को समझती है और इनपुट प्राप्त करती है और वे (उल्फा) रैलियां निकालने और विरोध प्रदर्शन करने के लिए देश के बाहर फोन करते हैं।


साथ ही उन्होंने पत्रकारों के एक वर्ग और संगठनों के साथ संपर्क बनाए रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि हमें इस बात की जानकारी है कि कौन फोन कॉल कर रहा है या कौन सा पत्रकार या संगठन संपर्क में रहे हैं।


इसके अलावा, शर्मा ने सवाल किया कि मेरे निर्वाचन क्षेत्र में मशाल रैली किसने निकाली थी? उन्होंने कहा, 'कौन लोग विरोध कर रहे थे? असमिया लोग घरों के अंदर सो रहे थे।' साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि तिनसुकिया में बीजेपी नेता पर हुए हमले पर भी उल्फा-आई ने ही निर्देश दिये थे और राज्य की जो मौजूदा स्थितियां है वो मीडिया की वजह से हैं। मीडिया शुरूआत से ही बीजेपी का विरोध कर रहा है।