नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर पूर्वोत्तर में जारी हिंसा के मसले पर लोकसभा में विपक्ष ने सरकार पर बांग्लादेश से संबंध खराब करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला किया, जबकि सत्तापक्ष ने विपक्ष पर पूर्वोत्तर में हिंसा भडक़ाने का प्रत्यारोप लगाया। इस तीखी नोकझोंक के बाद विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया। 

कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने शून्यकाल में इस मुद्दे को उठाया और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार की बात का खंडन करते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि वह बांग्लादेश के साथ संबंध बिगाड़ने की कोशिश कर रही है तथा पाकिस्तान और चीन को ऐसे हालात का फायदा लेने का मौका दे रही है। उन्होंने कहा, हम नहीं चाहते कि बांग्लादेश के साथ हमारे संबंध खराब हों। पाकिस्तान और चीन इस मौके का फायदा उठाने के लिए ताक में बैठे हैं।

चौधरी के इस आरोप पर सरकार की ओर से तीखी प्रतिक्रिया हुई। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कांग्रेस पूर्वाेत्तर में हिंसा भडक़ा रही है। भाजपा के निशिकांत दुबे ने कहा कि गठन के वक्त बांग्लादेश एक धर्मनिरपेक्ष देश था और बाद में वह एक इस्लामी देश हो गया। उन्होंने नेपाली मुस्लिम एम.के. सुब्बा का नाम लेकर कहा कि उसने देश में घुसपैठ करायी। दुबे ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम लेकर कहा कि उनके कार्यकाल में कांग्रेस ने पूर्वोत्तर में विदेशियों की घुसपैठ और धर्मान्तरण कराया, जिससे एक तरह से समूचे पूर्वोत्तर का ईसाईकरण हो गया है। दुबे के इतना कहने पर विपक्ष भडक़ उठा। चौधरी समेत कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस, वामदल, द्रमुक आदि दलों के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गये। बाद में तृणमूल कांग्रेस के प्रो. सौगत रॉय ने भी पूर्वोत्तर के विषय पर शून्यकाल में चर्चा करनी चाही, लेकिन अध्यक्ष ओम बिरला ने इसकी अनुमति नहीं दी। इससे नाराज हो कर तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने भी बहिर्गमन किया।

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