अखिल असम खिलंजिया छात्र संस्था ( आकसू) ने नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 का कड़े शब्दों में विरोध करते हुए कहा कि खिलंजिया विरोधी विधेयक हमें कतई बर्दास्त नहीं है। अगर समय रहते यह विधेयक  रद्द नहीं हुआ तो आगामी समय में हम  विधेयक विरोधी आंदोलन करने को बाध्य होंगे । इस आशय की बातें आज गुवाहाटी प्रेस क्लब में  आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में आकसू के अध्यक्ष वाई बरभूईयां ने दी । 

उन्होंने कहा कि इस विधेयक का विरोध असम साहित्य सभा, अखिल असम छान्न संघ के साथ ही 30 अन्य संगठनों के साथ  m ही कृषक मुक्ति संग्राम समिति m(केएमएसएस) के साथ 70 संगठनों के साथ ही बुद्धिजिवी वर्ग,  वकील समाज तथा छात्र संघ भी  सड़क पर उतर कर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर रहें है । 

बरभूईया का कहना है कि असम आन्दोलन में सैकडों लोगों के शहीद होने के बाद असम समझौता हुआ जिसके तहत 1971  के 24 मार्च के पहले किसी भी देश से आने वाले किसी भी जाति व धर्म के लोग असम में रह सकते है पर इसके बाद किसी भी  देश से आने वाले किसी भी मजहब के किसी भी भाषा-भाषी को असम में रहने को कोई अधिकार नही है। उनका कहना है कि हमारा स्पष्ट मत है कि असम में हिदु- मुसलमान एक साथ] मिलजुल कर रहे, असमिया-बंगाली एक साथ मिलजुल कर रहे , बोडो, राभा, मिसिंग,  कछारी, चाय जनजाति के साथ ही अन्य जनगोष्ठी के लोग एक साथ रहेंगे, वृहत्तर असमिया जाति का पूर्णगठन करना पड़ेगा ।