नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 को संसदीय समिति से हरी झंडी मिल गई है। इसके साथ ही बिल को संसद में पेश करने का रास्ता साफ हो गया है। भाजपा जहां बिल के पक्ष में है वहीं कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल बिल के विरोध में है। 

बिल को हरी झंडी मिलने से मरियानी से कांग्रेस विधायक रुपज्योति कुर्मी भड़क गए। उन्होंने बिल को हरी झंडी देने वाली संयुक्त संसदीय समिति पर जमकर हमला बोला है। कुर्मी ने कहा, मैं जेपीसी में शामिल भाजपा के सदस्यों को श्राप देता हूं और मैं उन्हें इतना पीटना चाहता हूं कि उनका शरीर चोट से नीला पड़ जाए। कहा जा रहा है कि 3 जनवरी को एक ड्राफ्ट रिपोर्ट पेश की जाएगी और उसके बाद नागरिकता संशोधन बिल को संसद में पेश किया जाएगा। 

कुर्मी ने कहा,उन्होंने(जेपीसी में शामिल भाजपा सदस्य)असम आंदोलन के शहीदों के बलिदान की अनदेखी की है। हम असम से अवैध घुसपैठियों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन सरकार यहां और विदेशियों का स्वागत करने की कोशिश कर रही है। आपको बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल 2016 में लोकसभा में पेश किया गया था। 

नागरिकता कानून 1955 में बना था। बिल में संशोधन के जरिए अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दिए जाने का प्रावधान किया गया है। इन तीनों देशों में रहने वाले हिंदू, बौद्ध,जैन, पारसी, सिख और ईसाई धार्मिक उत्पीडऩ के कारण भारत आ गए थे। उन्हें भारत में शरण मिली लेकिन नागरिकता नहीं मिल पाई। 

कुर्मी ने कहा, ऐसा लगता है कि विरोध करने वाले समूहों और संगठनों को हायर अथॉरिटीज से चुप रहने के लिए काफी पैसा मिला है। आज सभी संगठन शांत हैं। उन्हें उसी तरह विरोध करना चाहिए जैसा वे हमेशा करते हैं। असम के कृषि मंत्री और असम गण परिषद के अध्यक्ष अतुल बोरा ने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि भाजपा विधेयक को आगे नहीं बढ़ाएगी। हम विधेयक के खिलाफ है। हम जेपीसी की मीटिंग के नतीजों पर पार्टी फोरम में चर्चा करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। असम गण परिषद का एक धड़ा पार्टी नेतृत्व पर भाजपा का साथ छोडऩे के लिए दबाव बना रहा है। एजीपी के नेतृत्व ने भी यह कहा है कि अगर विधेयक को संसद में पेश किया गया तो वह गठबंधन से अलग हो जाएगी।