त्रिपुरा में विभिन्न गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के चिट फंड घोटाले की जांच से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के इंकार करने पर उच्च न्यायालय ने गृह मंत्रालय से सीबीआई को अतिरिक्त कर्मचारी उपलब्ध कराने तथा अन्य बुनियादी ढांचे उपलब्ध कराने को लेकर जवाब तलब किया है।


न्यायमूर्ति सुभाषिश तलपात्रा और न्यायमूर्ति अरिंदम लोध की युगल पीठ ने एक पीड़ति जमाकर्ता की याचिका पर सुनवाई के दौरान बुधवार को गृह मंत्रालय से इस मसले पर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।


सीबीआई के वकील ने कहा कि मानव संसाधन और अन्य आधाभूत ढांचे की कमी के कारण सीबीआई के लिए इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से भेजे गये 75 मामलों की जांच असंभव प्रतीत होती है। वर्ष 2014 में चिट फंड घोटाले के शिकार एक व्यक्ति ने राज्य में हुए चिट फंड घोटालों की जांच सीबीआई से कराने को लेकर न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। साथ ही निवेशकों के पैसे लौटाने का भी अनुरोध किया था।


उस समय न्यायालय ने मामले की सीबीआई से जांच कराने के बजाय इन मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया। एसआईटी ने चिट फंड घोटाले के 75 मामलों की जांच शुरू की तथा अदालत में इनमें से 64 मामलों में आरोप-पत्र भी दाखिल कर दिया।


इस बीच मुख्यमंत्री विपल्व देव के नेतृत्व में सत्ता में आयी सरकार ने चिट फंड से जुड़े सभी मामलों को सीबीआई के हवाले करने का निर्णय लिया। इसके बाद मामले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी गई। जब सीबीआई के वकील ने आधारभूत ढांचे के अभाव में इन मामलों की जांच में असमर्थता व्यक्त की तो अदालत ने इस संबंध मेें गृह मंत्रालय से मानव संसाधन और अन्य आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर जवाब दाखिल करने का आदेश दे दिया।


याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि विभिन्न गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों ने बड़ी संख्या में लोगों से धोखाधड़ी की है तथा सीबीआई जांच के बगैर किसी भी जमाकर्ता का पैसा वापस लौटाना संभव नहीं होगा। इससे पहले पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार ने केवल 37 मामलों को सीबीआई के हवाले किया था जिसमें काफी कम राशि शामिल थी। इस संबंध में दर्ज रोज वैली मामले में वाम मोर्चा सरकार के दो मंत्रियों से पूछताछ भी की गयी थी।


पूर्व समाज कल्याण मंत्री और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) विधायक विजिता नाथ से रोज वैली के बारे में उनके संबंधों को लेकर पूछताछ की गयी क्योंकि वह चुनाव लडऩे से पहले वह इस संस्थान की एजेंट थीं। पूर्व वित्त मंत्री बादल चौधरी की भूमिका को लेकर सवाल किये गये। इसके अलावा सीबीआई ने इन मंत्रियों के दो पूर्व निजी सचिवों से भी पूछताछ कर चुकी है।