पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रहे रामविलास पासवान की आज जयंती है।  इस मौके पर दिल्ली से लेकर बिहार के अलग-अलग जिलों में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। 

पार्टी में जारी विवाद के बीच दोनों गुट अलग-अलग तरीके से रामविलास पासवान की जयंती मना रहे हैं।  जमुई से सांसद और रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान ने दिल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय 12 जनपथ में अपने पिता रामविलास पासवान की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।  इस मौके पर उन्होंने कहा कि वह शेर के बेटे हैं और झुकने वाले नहीं हैं। 

इस दौरान पिता को यादकर चिराग काफी भावुक हो गए।  उन्होंने अपनी मां का पैर छूकर आशीर्वाद लिया।  चिराग ने कहा कि जब मुझे परिवार की सबसे ज्यादा जरूरत थी उस वक्त परिवार का कोई भी शख्स मेरे साथ नहीं है लेकिन मैं झुकने वाला नहीं मैं शेर का बेटा हूं और जनता के आशीर्वाद के लिए निकल रहा हूं। राम विलास पासवान की जयंती के अवसर पर उनके आवास 12 जनपथ में रामविलास पासवान जीवन पर वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप श्रीवास्तव द्वारा लिखी गई पुस्तक संकल्प साहस और संघर्ष का लोकार्पण भी उनकी पत्नी रीना पासवान ने किया।  इस मौके पर चिराग पासवान भी मौजूद थे। 

चिराग पासवान ने मोहन भागवत के बयान पर कहा कि हमारी सोच पहले से ही न जात न पात वाली रही है. मैं 21वीं सदी का पढ़ा-लिखा युवक हूं।  मैं नहीं मानता ये जात-पात मजहब।  मैं जिस प्रदेश से आता हूं वहाँ एक राजनीतिक समीकरण बैठाने का प्रयास किया जाता है जातियों के आधार पर, धर्म के आधार पर , ये ग़लत है. इसीलिए मैं कहता हूँ कि जाति-धर्म से ऊपर उठकर विकास पर बात करने की ज़रूरत है। 

दोपहर में दिल्ली से पटना पहुंचने के बाद चिराग पासवान हाजीपुर के लिए निकलेंगे जहां से वो अपनी आशीर्वाद यात्रा की शुरुआत करेंगे।  चिराग ने हाजीपुर से आशीर्वाद यात्रा को क्यों शुरू किया इसके पीछे दो वजह है।  पहली वजह इस सीट से लंबे समय तक उनके पिता रामविलास पासवान का प्रतिनिधित्व करना और दूसरी वजह चाचा से बागी बनकर पार्टी को तोड़ चुके पारस पासवान का यहां से सांसद होना है।  चिराग चाचा के घर में घुसकर पिता की संवेदना को साथ रखते हुए हमला करना चाहते हैं।