यूक्रेन में रूस के विशेष सैन्य अभियान के विरोध में जहां पश्चिमी देश रूस से तेल की खरीद पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश में लगे हैं, वहीं चीन के कुछ स्वतंत्र रिफाइनरी छिप-छिपकर छूट के साथ रूस से तेल खरीद रहे हैं। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।

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रिपोर्ट में चीन के पूर्वी तट पर बसे प्रांत शानदोंग में एक स्वतंत्र रिफाइनरी के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि यूक्रेन में रूस के हमले के बाद से रूस के साथ तेल की खरीद-फरोख्त को लेकर हुए करार की सूचना अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए आधिकारिक तौर पर नहीं दी गयी है। अधिकारी के मुताबिक राज्य के स्वामित्व वाली कमोडिटी ट्रेडिंग फर्मों की तरफ से रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर रिफाइनरी के लिए कुछ कोटे की खरीददारी की गई है। ज्यादातर राज्य की व्यापारिक कंपनियों ने नयी आपूर्ति से संबंधित अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है। 

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आपको बता दें कि रिपोर्ट के अनुसार रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक जितना कच्चा तेल भारत ने रूस से खरीदा है, अमेरिका ने उससे भी ज्यादा कच्चा तेल वहां से लिया है। रूस के निर्यातक देशों की लिस्ट में भारत ही सबसे नीचे है। अमेरिका ने तो इजिप्ट से भी अधिक कच्चा तेल खरीदा है। भारत में कुछ सरकारी कंपनियों और रिलायंस ने कुल मिलाकर करीब 3 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदा है। रिपोर्ट के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद पिछले दो महीनों में रूस ने जितना फॉसिल फ्यूल (कच्चा तेल, ऑयल प्रोडक्ट, पाइप्ड गैस, एलएनजी और कोयला) निर्यात किया है, उसका 71 फीसदी तो सिर्फ यूरोपियन देशों को ही भेजा है।