चीन एकबार फिर दुनिया के खतरा बन गया है क्योंकि यहां के परमाणु संयत्र से खतरानाक रेडियोएक्टिव पदार्थ लीक हो गया है। चीन ने इस बात को दुनिया से अबतक छिपाकर रखा हुआ था। इस परमाणु संयंत्र के निर्माण में फ्रांसीसी पावर ग्रुप ईडीएफ की लगभग 30 फीसदी हिस्सेदारी शामिल है। ईडीएफ ने इस लीकेज को लेकर अपनी स्वतंत्र जांच भी शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक लीक की भयावहता को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। पावर प्लांट के आसपास रहने वाले चीन के स्थानीय लोग रूस के चेर्नोबिल में आज से 35 साल पहले की घटना को याद कर डरे हुए हैं।

खबर है कि पिछले एक हफ्ते से अमेरिकी सरकार इस लीकेज रिपोर्ट का आंकलन कर रही थी। इस रिपोर्ट में फ्रांसीसी कंपनी ईडीएफ ने यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के सहायता की गुहार की थी। कंपनी ने इसमें अमेरिका को आसन्न रेडियोलॉजिकल खतरे की साफ साफ चेतावनी दी थी। इसमें बताया गया है कि चीनी सुरक्षा प्राधिकरण ग्वांगडोंग प्रांत में ताईशान परमाणु ऊर्जा संयंत्र के बाहर विकिरण की सीमा को बढ़ा रहा है। जिसके बाद यह अंदेशा जताया जा रहा है कि इस प्लांट से रेडियोएक्टिव विकिरण हुआ है।

इस न्यूक्लियर पावर प्लांट को ईडीएफ ने डिजाइन किया है। इतना ही नहीं, संचालन के काम में भी चीन इस कंपनी की मदद लेता है। इसी कंपनी ने रेडियोएक्टिव पदार्थ के रिसाव और खतरे की चेतावनी दी है। ईडीएफ ने कहा कि ताइशन संयंत्र के रिएक्टर नंबर 1 के प्राथमिक सर्किट से क्रिप्टन और जिनॉन गैस का रिसाव हुआ था। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि यह अक्रिय गैसें हैं लेकिन इनमें रेडियोएक्टिव गुण पाए जाते हैं। अगर भविष्य में रिसाव की मात्रा बढ़ती है तो बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।

फ्रांस की कंपनी के चेतावनी के बावजूद अमेरिका अभी तक यह मानने को तैयार नहीं है कि चीन में परमाणु संयंत्र से रिसाव की स्थिति गंभीर है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यह रिसाव चीनी नागरिकों या पर्यावरण के लिए कोई गंभीर खतरा पैदा नहीं करती है। इसमें असामान्य बात यह है कि फ्रांसीसी कंपनी ने अमेरिका से इस मुद्दे पर सहायता मांगी है, जबकि चीन इस दावे को मानने के लिए तैयार नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति गंभीर होती है तो अमेरिका के उपर लापरवाही करने का आरोप लग सकता है।

हालांकि, पहली बार सूचना मिलने के बाद अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने पिछले सप्ताह कई बैठकें कीं। जिनमें दो दो डिप्टी स्तर पर और एक सहायक सचिव स्तर पर हुई बैठक भी शामिल थी। सहायक सचिव वाली हाई लेवल मीटिंग का नेतृत्व चीन के लिए एनएससी के वरिष्ठ निदेशक लौरा रोसेनबर्गर ने किया था। इसमें शस्त्र नियंत्रण के वरिष्ठ निदेशक मैलोरी स्टीवर्ट भी शामिल हुई थीं। इस बैठक के दौरान अमेरिका ने फ्रांस सरकार, वहां की कंपनी और चीन से भी संपर्क किया।

करीब 35 साल पहले 1986 में यूक्रेन के चेर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट में विनाशकारी धमाका हुआ था। तब इसे बंद कर दिया गया और एक हिस्सा आज भी बंद है। उस घटना के बाद प्लांट के यूनिट 4 रिएक्टर के इर्द-गिर्द एक स्टील और कंक्रीट का पिंजड़ा (Shelter) बनाया गया था, जिससे रेडिएशन को रोका जा सके। यहां रेडिएशन की दर इतनी ज्यादा थी कि सैकड़ों किलोमीटर दूर तक रहने वाले लोगों को रातोंरात हटा दिया गया। पूरा चेर्नोबिल शहर आज भी वीरान इमारतों के रूप में आज भी उस दुर्घटना की याद दिलाता है।