चीन के विदेश मंत्री वांग यी के इस महीने के अंत में भारत आने की संभावना है। साथ ही वह नेपाल और पाकिस्तान की यात्रा भी कर सकते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि हमारे पास इस समय इस संबंध साझा करने के लिए अभी कोई जानकारी नहीं है। चीनी विदेश मंत्री और स्टेट काउंसलर वांग यी 26 मार्च को नेपाल की राजधानी काठमांडू का दौरा करने वाले हैं, ताकि बीआरआई के कार्यान्वयन पर जोर दिया जा सके और दो परियोजनाओं पर हस्ताक्षर किए जा सकें। 

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उन्हें 22-23 मार्च को इस्लामाबाद में आयोजित इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक में ‘सम्मानित अतिथि’ के रूप में शामिल होने के लिए भी आमंत्रित किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह कॉन्फ्रेंस को स्पेशल गेस्ट के तौर पर संबोधित करने वाले हैं। लगभग दो साल पहले वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच आमना-सामना आने के बाद से चीनी विदेश मंत्री की यात्रा, किसी भी चीनी मंत्री की पहली यात्रा होगी। विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बातचीत के लिए यह यात्रा 24 या 25 मार्च को हो सकती है। 

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जून 2020 में खूनी गलवान संघर्ष के बाद से भारत और चीन दोनों ने कूटनीतिक और सैन्य स्तर की वार्ता की एक श्रृंखला आयोजित की है। यात्रा तब हो रही है, जब विदेश मंत्री जयशंकर ने दृढ़ता से कहा है कि भारत एलएसी की यथास्थिति में किसी भी बदलाव के लिए सहमत नहीं होगा। उन्होंने पिछले महीने पेरिस में एक वार्ता के दौरान कहा, हम पूरी तरह से स्पष्ट हैं कि हम यथास्थिति में किसी भी बदलाव या एलएसी को एकतरफा रूप से बदलने के किसी भी प्रयास पर सहमत नहीं होंगे। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में बोलते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि चीन के साथ भारत के संबंध अभी ‘बहुत कठिन दौर’ से गुजर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा की स्थिति संबंधों की स्थिति का निर्धारण करेगी। उन भारतीय छात्रों के संबंध में जो बीजिंग द्वारा कोविड प्रतिबंधों के कारण अपनी पढ़ाई के लिए चीन नहीं लौट पाए हैं। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि आज तक चीनी पक्ष ने भारतीयों की वापसी के बारे में कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है। भारत चीनी अधिकारियों के साथ इस मामले को आगे बढ़ाना जारी रखेगा। उन्होंने कहा, बीजिंग में हमारा दूतावास, हमारे वाणिज्य दूतावास, हमारा मंत्रालय कई मौकों पर चीन में संबंधित अधिकारियों के साथ इस मामले को उठा रहा है। उन्होंने कहा, हमने छात्रों की दुर्दशा पर प्रकाश डाला है और इन कड़े प्रतिबंधों की निरंतरता उनके शैक्षणिक करियर, हजारों छात्रों के शिक्षा करियर को खतरे में डाल रही है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पिछले साल सितंबर में दुशांबे में अपनी बैठक के दौरान वांग यी के साथ व्यक्तिगत रूप से इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा कि भारत ने इस मुद्दे पर चीनी विदेश मंत्रालय के बयानों को नोट किया है। उन्होंने कहा, हमने आठ फरवरी को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता द्वारा दिए गए बयान पर ध्यान दिया है जब भारतीय मीडिया के एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि चीन विदेशी छात्रों को उनकी पढ़ाई के लिए चीन लौटने की अनुमति देने के लिए समन्वित तरीके से व्यवस्था पर विचार कर रहा है। प्रवक्ता ने कहा, चीनी प्रवक्ता के हालिया बयान में कहा गया है कि महामारी की स्थिति और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय छात्रों को ध्यान में रखते हुए और वे कुछ अंतरराष्ट्रीय छात्रों की वापसी के लिए समन्वय कर रहे हैं। उन्होंने कहा, हम चीनी पक्ष से अपने छात्रों के हित में एक अनुकूल रुख अपनाने का आग्रह करते रहेंगे और वे चीन में जल्द वापसी की सुविधा प्रदान करेंगे ताकि हमारे छात्र अपनी पढ़ाई कर सकें।