तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद अब चीन भी दूसरे देश पर ऐसा ही करने जा रहा है। ताइवान के पास समुद्र में चीनी सेना ने असॉल्ट ड्रिल किया है। इस दौरान चीनी फाइटर जेट की गरज ने ताइवान और चीन के बीच तनाव को फिर बढ़ा दिया है। मंगलवार को हुए इस ड्रिल को लेकर चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी ने कहा कि चीन की संप्रभुता की रक्षआ के लिए यह ड्रिल बेहद जरुरी है। चीन ने स्वशासित ताइवान के बिल्कुल पास में यह मिलिट्री एक्सरसाइज की है जिसे चीन अपना हिस्सा मानता है। चीन के ईस्टर्न थियेटर कमांड के प्रवक्ता शी यी ने एक बयान जारी कर इस बारे में बताया है।

बताया जा रहा है कि चीन ने हथियारों का यह अभ्यास ताइवान के साउथईस्टर्न और साउथवेस्टर्न इलाके में किया। ताइवान के रक्षा मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि वो समुद्र और आकाश में हालात पर नजर बना कर रख रहे हैं और किसी भी स्थिति में जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार हैं। इससे पहले जून के महीने में चीन के 28 फाइटर जेट ताइवान की तरफ उड़ान भरते नजर आए थे।

चीन ने यह अभ्यास कर कहीं ना कहीं यूएस को भी चुनौती दे दी है। पिछले सफ्ताह यूएस और ताइवान कोस्ट गार्ड के अधिकारियों की एक बैठक हुई थी जिसमें दोनों के बीच सहयोग और संवाद पर चर्चा हुई थी। हाल ही में अमेरिकी विदेश विभाग ने ताइवान को 40 155मिमी M109A6 मीडियम ऑटोमेटिक होवित्जर आर्टिलरी सिस्टम की खरीद की मंजूरी दी थी। यह सौदा करीब 750 मिलियन डॉलर का हुआ है था।

माना जाता है कि यूनाइटेड स्टेट और ताइवान के बीच भले ही आधिकारिक रिश्ते नहीं हैं लेकिन अमेरिका, ताइवान को हथियार की सप्लाई करने वाले अहम देश है। इसके अलावा ताइवान से उसके राजनीतिक रिश्ते भी हैं। चीन के साथ कमजोर होते संबंधों के बीच यूएस, ताइवन के साथ अपने संबंधों को लगातार अपने संबंधों को बढ़ा रहा है। ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है।

चीन ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह ताइवान सैन्‍य संबंध तोड़ दे। चीन ने जोर देकर हाल में कहा था कि ताइवान की आजादी का मतलब होगा अमेरिका के साथ जंग। चीन मंत्रालय के प्रवक्‍ता रेन गुओकियान्‍ग ने कहा था कि अमेरिका हमारे आंतरिक मामलों में हस्‍तक्षेप नहीं करे। उन्‍होंने कहा कि चीन इस द्वीप देश को जोड़ने में भरोसा रखता है। वह ताइवान पर किसी बाहरी हस्‍तक्षेप का विरोध करता है।

चीन ने अमेरिका से कहा है कि वह ताइवान से सभी तरह के सैन्‍य र‍िश्‍ते खत्‍म करे। इसके पूर्व चीन ने जी-7 देशों की बैठक में भी ताइवान का मुद्दा उठा था। सवाल यह है कि क्‍या हांगकांग के बाद चीन सच में अमेरिका से दो-दो हाथ करने की तैयारी में है।