चीन के दुष्प्रचार की फिर कलई खुल गई है। युद्धाभ्यास के जो फोटो और वीडियो ड्रैगन ने भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालने के लिए पोस्ट किए थे उन्होंने ही उसकी पोल खोल दी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किरकिरी होने के बाद चीन ने ये फोटो-वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा लिए हैं।

जानकारी के अनुसार चीन के सरकारी टीवी चैनल ने पिछले दिनों तिब्बत के इलाके में 4700 मीटर की ऊंचाई पर चीनी सेना के युद्धाभ्यास की तस्वीरें शेयर की थीं। उसमें दिख रहा था कि चीनी सैनिक गोली चलाने के लिए निशाना साध रहे हैं। इसमें सैनिक राइफल में लगे पेरिस्कोप से देखकर निशाना साध रहे हैं। इसी फोटो को खींचने में चीनी दुष्प्रचार तंत्र से चूक हो गई। वास्तव में चीनी सैनिक केवल फोटो खिंचाने के लिए निशाना साध रहे थे।

चीन के इस फर्जीवाड़े की पोल खोलने वाले सैन्य विशेषज्ञ कर्नल विनायक भट्ट के मुताबिक चीनी सैनिक जिस समय निशाना साध रहे थे, उस समय उनके पेरिस्कोप में लगा रबर का अगला हिस्सा झुका था। ऐसे में चीनी सैनिक बिना पेरिस्कोप के निशाना साध रहे थे और दावा कर रहे थे कि वे वास्तव में निशाना लगा रहे हैं। रबर के हिस्से के झुके होने के कारण चीनी सैनिकों का सटीक निशाना लगाना असंभव था।

जानकारी के अनुसार यह पहला मौका नहीं है जब चीन ने भारत पर दबाव बनाने के लिए ऐसी हरकत की है। इससे पहले भी चीन ने डराने के लिए गुब्बारे को पेंट करके मिसाइल लॉन्चर बताकर शेयर करना शुरू कर दिया। हालांकि एक गड़बड़ी से उनके इस दावे की हवा निकल गई और अब उनकी किरकिरी हो रही है। चीन की सेना पीएलए ने जिस गुब्बारे को रॉकेट लॉन्चर की शक्ल दी थी वह एक जगह से पिचका था। ट्रोल होने पर उसे तुरंत हटा लिया गया। इसके अलावा चीन के एक टैंक का वीडियो भी निशाने पर आने के बाद सोशल मीडिया साइट से गायब कर दिया गया।